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आखिर करण थापर शिकायत क्यों कर रहे हैं? उन्हीं के वशंजों के हाथों में रही है लुटियंस दिल्ली की चाबी!

दिल्ली के ऐसे बहुत कम घर हैं जहां करण थापर का प्रवेश निषिद्ध हो। फिर भी करण थापर को यह शिकायत है कि कुछ घरों के दरवाजे उनके लिए बंद हैं। करण थापर ये शिकायत क्यों कर रहे हैं? उनकी शिकायत के यथार्थ को जानने के लिए आपको उनके वंश के इतिहास को समझना होगा, जिनके तार नेहरू-गांधी और खुशवंत सिंह के वंश के साथ एकीकृत पंजाब के इतिहास से भी जुड़े हैं।

मुख्य बिंदु

* करण थापर के परिवार का नेहरू-गांधी तथा खुशवंत सिंह के परिवार से पारिवारिक संबंध रहा है

* 20 जुलाई को जारी थापर की नई किताब ‘डेविल्स एडवोकेट’ से उजागर हुए कई ऐतिहासिक राज

थापर की वंशावली
करण थापर के दादा दीवान बहादुर कुंज बिहारी थापर का जन्म 1855 में लाहौर में हुआ था। वे पंजाबी अभिजात्य वर्ग से संबंधित थे जो औपनिवेशिक ब्रिटिश भारतीय सेना के लिए कमीशन एजेंट के रूप में कार्यरत थे। कुंज बिहारी थापर भी हयात खान, चौधरी गज्जन सिंह तथा राय बहादुर लाल चंद समेत उन चार लोगों में शामिल थे जिन्होंने पजांब के गवर्नर सर मैकल ओ-ड्वायर के फंड में 1.75 लाख रुपये चंदा दिया था। ड्वायर वही व्यक्ति था जिसने जलियांवाला बाग नरसंहार के दौरान ब्रिगेडियर जनरल रेनॉल्ट डायर पर कार्रवाई का बचाव किया था। ब्रिटिश सरकार के प्रति अपनी वफादारी के लिए कुंज बिहारी थापर भी 1920 में ब्रिटिश साम्राज्य से पुरस्कृत हुए थे।

Thapar dynasty ( Courtesy The Print)

कुंज बिहारी थापर के तीन बेटे थे दया राम, प्रेम नाथ तथा प्राण नाथ। इसके अलावा उन्हें पांच बेटियां भी थीं। दयाराम तथा प्राण नाथ (करण थापर के पिता) ने ही पारिवारिक संपर्क बढ़ाने का एक नेटवर्क तैयार किया ताकि थापर वंश आने वाले सालों में भी राजनीतिक और सामाजिक रूप से प्रासंगिक बना रहे। करण थापर के पिता जनरल प्राण नाथ थापर एकमात्र ऐसे सेना प्रमुख थे जिन्होंने युद्ध हारा था। 1962 में चीन से लड़ाई हारने के कारण ही उन्हें 19 नवंबर 1962 को अपमानित होकर जबरन इस्तीफा देना पड़ा था। 1936 में प्राण नाथ थापर ने गौतम सहगल की बहन बिमला बशिराम सहगल से शादी की थी। वहीं 1944 में गौतम सहगल की नयनतारा सहगल से शादी हुई।

नयनतारा सहगल अंग्रेजी लेखिका हैं। नयनतारा सहगल जवाहरलाल नेहरू की बहन विजया लक्ष्मी की तीन बेटियों में से दूसरी बेटी थी। मोतीलाल नेहरू की बेटी विजया लक्ष्मी, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक सक्रिय सदस्य थी और संविधान सभा की सदस्य के रूप में कार्यरत थीं। इसके अलावा वह सोवियत यूनियन, संयुक्त राष्ट्र, मैक्सिको तथा आयरलैंड में भारत की राजदूत भी रही थीं। वह 1953 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। बिमला सहगल की बहन, जो करण थापर की मामी थी, ने वीपी मेनन के बेटे से शादी की थी। यह तथ्य करण थापर ने 17 नवंबर 2013 को लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा लिखे ब्लॉग पर उनसे जिरह करने के दौरान स्वयं रखा था। दरअसल आडवाणी ने “मेनन ने ब्रिटिश जनरल को घेरा” शीर्षक से एक ब्लॉग लिखा था। अपने ब्लॉग में आडवाणी ने लिखा था कि भारत के पहले पूर्व उप-प्रधानमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के सचिव के रूप मेनन ने देश के विभाजन के बाद भारत को राजनीतिक रूप से एकीकृत करने में अहम भूमिका निभाई थी। प्राण नाथ और बिमला की चार संताने थी उन्हीं में से सबसे छोटे करण थापर हैं।

दयाराम थापर अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। वह भारतीय सेना में डॉक्टर थे जो बाद में भारतीय सैन्य बल मेडिकल सर्विस के महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्हें एक बेटा रोमेश थापर और दो बेटियां बिमला और रोमिला थीं। रोमिला थापर भारत की अग्रणीय इतिहासकारों में से एक हैं। अपनी ऐतिहासिक विश्लेषण के कारण ही उन्हें वाम-झुकाव वाली इतिहासकार माना जाता है। वह शुरू से ही प्राचीन भारत का अध्ययन करती रही हैं।
2004 में, यूएस लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस ने उन्हें दक्षिण के देशों और संस्कृतियों के मामले में पहले अध्यक्ष के रूम में नियुक्त किया। वह 2005 में पद्म भूषण सम्मान को अस्वीकार कर चुकी हैं।

रोमेश थापर का जन्म 1922 में लाहौर में हुआ था। पढ़ाई करने के लिए घरवालों ने उन्हें इंग्लैंड भेज दिया। उस समय ब्रिटिश यूनिवर्सिटियों में युद्ध के उपरांत समाजवाद पर संवाद काफी लोकप्रिय था। इस संवाद ने उनपर भी गहरा प्रभाव डाला। दरअसल यहीं कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) में प्रवेश करने की उनकी नींव पड़ी थी। और 1987 में हुई मृत्यु तक वह कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने रहे।

अपनी पत्नी राज के साथ मिलकर रोमेश ने 1959 में सेमिनार नाम की एक मासिक पत्रिका शुरू की थी। बाद में यह पत्रिका नेहरू के विचार से सानिध्य रखने वालों के बीच काफी लोकप्रिय और ताकतवर भी हुई। 1960 के दशक के अंत में रोमेश और राज बौद्धिक अभिजात्य वर्ग के हिस्सा बन गए थे। ये लोग आंतरिक कैबिनेट के सदस्य के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने इंदिरा गांधी के करीबी होने का आनंद लिया। नेहरू के निधन के बाद यही एक दोस्ती थी जो मजबूत हुई थी।

राज और रोमेश थापर के दो बच्चे थे मालविका (माला) सिंह तथा वाल्मिक थापर।
वाल्मिक थापर ने अभिनेता शशि कपूर की बेटी संजना कपूर से शादी की। वाल्मिक आज भारत की सबसे प्रतिष्ठित वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों में से एक है। वाल्मिक ने बीबीसी, एनिमल प्लानेट, डिस्कवरी तता नेशनल जियोग्राफी के लिए डॉक्यूमेंट्री बनाई है। मालविका थापर की तेजवीर “जुगनू” सिंह के साथ शादी हुई। तेजवीर सिंह नई दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में से एक शोभा सिंह के बेटे भगवंत सिंह के बेटे हैं। शोभा सिंह वही व्यक्ति हैं जिन्होंने दिल्ली का लुटियन जोने बनाया था, जब भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित की गयी थी!

अपने अभिभावक के गुजर जाने के बाद मालविका और तेजबीर ने एक साथ मिलकर सेमिनार चलाया। वर्तमान में मालविका राजस्थान सरकार के संस्कृति और पर्यटन मामले की सलाहकार हैं। मालविका और वाल्मिक ने 2016 में राजस्थान के रेलवे प्लेटफॉर्म के सौंदर्यीकरण की सरकारी परियोजना शुरू की थी।

सिंह वंश
तेजवीर सिंह शोभा सिंह के पोते हैं। शोभा सिंह ही 8 अप्रैल 1929 को संसद में हुए बम विस्फोट के मुख्य गवाह थे। शोभा सिंह ने ही भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की पहचान की थी। उन्हीं की पहचान और गवाही के आधार पर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई थी। तेजवीर और मालविका के वंशज एक दूसरे के प्रतिबिंब जैसे हैं। शोभा सिंह की वफादारी ब्रिटिश सरकार के प्रति वैसे ही थी जैसे कुंज बिहारी थापर की थी। इसी वजह से दोनों वंशजों को अकूत संपत्ति के साथ प्रतिष्ठा भी मिली। भारत के तत्कालिन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग ने जैसे ही भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की ब्रिटिश सरकार ने सुजान सिंह के साथ उन्हें भी लुटियंस दिल्ली बनाने का ठेका देकर पुरस्कृत किया। शोभा सिंह के छोटे भाई सरदार उज्जल सिंह सांसद बन गए जो बाद में पंजाब और तमिलनाडु के राज्यपाल भी बने।

सर शोभा सिंह के चार बेटे थे भगवंत, खुशवंत, गुरबक्श और दलजीत और एक बेटी थी मोहिंदर कौर।
खुशवंत सिंह एक नामी पत्रकार और लेखक होने के साथ ही एक राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने 1980 से 86 तक राज्य सभा के सदस्य के रूप में देश की सेवा की। इंदिरा गांधी के आपातकाल के समर्थक के रूप में देखे जाने के कारण उनकी अक्सर आलोचना होती रही। वह खुले रूप से कांग्रेस के समर्थक थे। इसके एवज में उन्हें 1974 में पद्म-भूषण पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। लेकिन 1984 में ऑपरेशन ब्लू-स्टार के खिलाफ उन्होंने अपना पुरस्कार वापस कर दिया। बाद में साल 2007 में उन्हें पद्म-विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मालूम हो कि यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। खुशवंत सिंह का मार्च 014 में देहांत हो गया।

नोट: मूल खबर पढने के लिए क्लिक करें

URL: Dynasty Of Thapar related to builder of lutyens delhi sobha singh and nehru family

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1 Comment

  1. M S Chauhan says:

    Nagpur city has corruptions, comment on it too. Some proofs are available.

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