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Movie Review: महेश बाबू के आस्तीन चढ़ाते ही सिनेमा हॉल में सीटियां गूंजने लगती है

विपुल रेगे। महेश बाबू की सरकारु वारी पाटा ने धुंआधार ओपनिंग ली है। तेलुगु भाषा में प्रदर्शित हुई इस फिल्म ने मात्र पांच दिनों में लागत वसूल कर लाभ कमाने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। सरकारु वारी पाटा महेश बाबू के स्टार पॉवर से प्रज्ज्वलित होती है। इस समय दक्षिण में महेश बाबू की ऑफ स्क्रीन इमेज वही है, जो मेगा स्टार रजनीकांत की हुआ करती है। उनके प्रशंसक उनकी एक झलक पाने को आतुर है। महेश बाबू के प्रशंसक भी सुपर स्टार यश के प्रशंसकों की तरह हैं। उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि फिल्म का कंटेंट क्या है। ये दक्षिण का स्टारडम है, जहाँ महेश बाबू के आस्तीन चढ़ाते ही सिनेमा हॉल में सीटियां गूंजने लगती है।

महेश उर्फ़ माही अमेरिका में एक फाइनेंस एजेंट है। उसकी अपनी एक फाइनेंस कंपनी है। उसका पैसा खाकर भागना बहुत मुश्किल है। माही अपना पैसा कर्जदार के हलक से भी खींच लाता है। एक दिन उसे कलावती मिलती है। कलावती को जुआं खेलने की लत है। जब उसके पास पैसा ख़त्म हो जाता है तो वह माही से प्रेम का नाटक करती है और उससे दस हज़ार डॉलर ले लेती है।

एक दिन राज़ खुलता है और माही अपना पैसा वापस माँगता है। जब पैसा नहीं मिलता तो माही भारत जा पहुँचता है। कलावती का पिता राजेन्द्रनाथ एक राजनीतिज्ञ है। अब माही की टक्कर सीधी एक रसूखदार नेता से है। ये एक टिपिकल दक्षिण स्टाइल की फिल्म है। इस धूम धड़ाके वाली फिल्म में सामाजिक सरोकार भी झलकता है। सामाजिक सरोकार महेश बाबू की फिल्मों में स्थायी तत्व होता है।

फिल्म का कथानक सुंदर है और तीव्र गति से भागता है। एक्शन सीक्वेंस पर बहुत मेहनत की गई है। इनमे वीएफएक्स पर कम निर्भर रहकर आपसी फाइट अधिक दिखाई गई है। माही और कलावती का प्रेम प्रसंग फिल्म की कमज़ोर कड़ी है। दोनों के बीच एक पल के लिए भी केमेस्ट्री नहीं झलकती है। महेश बाबू का किरदार उभर कर आता है लेकिन कलावती का किरदार करने वाली कीर्ति सुरेश कमज़ोर पड़ गई हैं।

राजेन्द्रनाथ का किरदार करने वाले समुथिराकानी ने सुंदर अभिनय किया है। फिल्म का स्क्रीनप्ले स्मूद है और बाकी कलाकारों ने भी अच्छा अभिनय किया है। महेश बाबू की और फिल्मों की तरह ही सरकारु वारी पाटा एक बड़ी सफलता की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। इसका बजट मात्र 60 करोड़ है। मात्र छह दिनों में फिल्म ने 157 करोड़ से अधिक का कलेक्शन कर बता दिया है कि महेश बाबू का स्टार पॉवर क्या है।

समीक्षकों ने फिल्म को बहुत ही बुरी प्रतिक्रियाएं दी थी। हालाँकि समीक्षकों की राय को झुठलाते हुए महेश बाबू सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं। एक्शन दृश्यों में उनका मैनरिज्म पूर्ण रुप से उभर कर आता है। यही कारण है कि स्टार निर्देशक एस.एस. राजामौली उन्हें अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए लेने की योजना बना रहे हैं। हिन्दी पट्टी में ये फिल्म मूल तेलुगु भाषा के साथ प्रदर्शित हुई है इसलिए महेश बाबू की फिल्म को हिन्दी दर्शक नहीं मिले।

तेलुगु भाषी दर्शकों ने ये फिल्म देखी लेकिन हिन्दी क्षेत्रों में उनकी संख्या सीमित ही है। इस फिल्म को हिन्दी डब नहीं किया गया है। फिल्म का हिन्दी वर्जन संभवत इस वर्ष के अंत तक टीवी पर उपलब्ध हो सकेगा।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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