पोप फ्रांसिस के नाम भारत से मारिया विर्थ का खुला खत, कहा, भारत में क्रिश्चियन मिशनरी की कोई आवश्यकता नहीं है!

33 सालों से भारत में रह रही जर्मनी की मारिया विर्थ ने जब दक्षिणी राज्यों का दौरा किया तो उन्हें वहां कई नए चर्च दिखे। तभी उनके दिमाग में पोप फ्रांसिस के नाम एक खुला खत लिखने का खयाल आया। पोप फ्रांसिस को अपने ‘बोल्ड’ (बेबाक) बयान के लिए पश्चिम में काफी प्रशंसा मिलती है। जबकि वे सिर्फ धर्मों के सम्मानजनक सहअस्तित्व की ही बात करते हैं। लेकिन अब उन्हें अपनी ही बातों पर अमल करने की जरूरत है।

मुख्य बिंदु

* विर्थ ने अपने पत्र में बताया की अस्तित्वपूर्ण, सार्थक जीवन के लिए भारत का दार्शनिक आधार कितना ठोस और प्राचीन है
* पोप से अपने पद को यादगार बनाने के लिए चर्च के विशेष और सर्वोपरि होने का दंभ त्यागने को कहा

मारिया ने अपने खुले खत के माध्यम से न सिर्फ ईसाइयत और इसलाम के दुर्गुणों का उल्लेख किया है बल्कि दोनों धर्मों के विरोधाभास के बारे में भी बताया। उन्होंने ये भी माना कि सनातन धर्म में भी कुछ दुर्गुण हैं, लेकिन जिस प्रकार क्रिश्चियन एक खास उद्देश्य के तहत भारत में कन्वर्जन को बढ़ावा देने में जुटे हैं उसके बारे में भी आगाह किया है। वह मानती हैं कि सर्वधर्म समभाव ही सनातन धर्म का उद्देस्य है और लक्ष्य भी।

फ्रांसिस पोप को लिखे खत में विर्थ ने लिखा है कि जब भी अधिकांश क्रिश्चियन चिंतन करना शुरू करते हैं तो वे बड़ी ताकत में विश्वास करने लगते हैं, लेकिन वे भगवान में विश्वास नहीं करते। विर्थ ने जर्मनी में करीब 50 लोगों से बात की और उनसे पूछा कि क्या आपको विश्वास है कि जीसस क्राइस्ट के बारे में सुनने के बाद ईसाइयत नहीं स्वीकारने वाले हिंदू नरक में जाएंगे? एक ने भी हां में जवाब नहीं दिया, यहां तक कि एक पादरी ने भी न में ही उत्तर दिया!

जानकर आपको ताज्जुब होगा कि एक भी जर्मन, जिनसे वह मिलीं, भारत में मिशनरी गतिविधियों के समर्थन में नहीं था। जबकि जॉन पॉल द्वितीय ने भारत में चर्च की मंशा को लेकर घोषणा की थी कि कैसे मिशनरी गतिविधियों के लिए भारत उपजाऊ जमीन है? जॉन पॉल द्वितीय की यह घोषणा समानजनक सहअस्तित्व के बिल्कुल खिलाफ है।

विर्थ ने अपने खत में लिखा है कि

वह 33 सालों से भारत में रह रही है। इस हैसियत से वह आधिकारिक तौर पर कह सकती है कि भारत में क्रिश्चियन मिशनरी की कोई आवश्यकता नहीं है। फिर भी यहां पर भौतिक लाभ देकर और चर्च बनाकर कन्वर्जन करने के लिए काफी धन भेजा जा रहा है। ऐसा सिर्फ कैथोलिक के हितों के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा किसी अन्य क्रिश्चियन संप्रदाय के लिए नहीं जो वाकई में गरीब हिंदुओं के लिए प्रार्थना करते हैं। सही अर्थों में कैथोलिक चर्च हिंदुओं का सम्मान करना शुरू कर दे, वह इससे ज्यादा प्रभावशाली होगा।

उन्होंने अपने खत में पोप फ्रांसिस को बताया कि

अगर आपका यह खयाल है कि हिंदू धर्म एक पथभ्रष्ट धर्म है इसलिए हिंदू अपने लाखों देवी-देवताओं को छोड़कर आपके ईशु को अपनाकर अच्छा करेंगे, तो यकीन मानिए आपका यह खयाल बिल्कुल गलत और आधारहीन है। क्योंकि क्रिश्चियनिटी से अधिक निंदनीय कोई दूसरा हो ही नहीं सकता! हिंदू धर्म की तो आप बात ही छोड़ दीजिए। पश्चिम में कुछ ही विद्वान जानते है कि भारत की प्राचीन परंपरा कितनी सुदृढ़ रही है। अस्तित्वपूर्ण, सार्थक जीवन के लिए अस्तित्व और सहायक सिद्धांतों के ठोस दार्शनिक आधार के बारे में भारत ‘धर्म’ से भी पहले से जानता है। जबकि इसके बारे में हम आज जानते हैं।

भारत के ऋषियों ने कई युगों पहले ही यह खोज ली थी कि इस पूरे ब्रह्मांड के मूल में सर्वव्यापी विराजमान है, जो अवर्णनीय है। इसे सिर्फ संपूर्ण जागृत अवस्था में ही वर्णन किया जा सकता है। क्रिश्चियन धर्म की जो मूल उक्ति है कि ‘जैसा बोओगे वैसा काटोगे’, वह युगों पहले से ही हिंदू धर्म का विधान रहा है कि कर्म के अनुसार फल मिलेगा।

मारिया विर्थ ने अपने पत्र में पोप से कहा है कि

अगर वाकई में आप दूसरे धर्म को भी सम्मान देने के प्रति गंभीर हैं तो सबसे पहले अपने रिलिजन को खास या सबसे विशेष होने का दावा करना छोड़िए तथा जिस हिंदू धर्म ने पूरी दुनिया को गंभीर दर्शन और महान संस्कृति दी है उसका सम्मान करना शुरू कीजिए। हम सभी आपकी छत्रछाया में कैथोलिक चर्च से अच्छी खबर सुनने को उत्सुक हैं।

अपने खत के अंत में मारिया पोप से कहती हैं कि

चर्च को अपंग करने वाला मुख्य मुद्दा यह नहीं है कि महिलाओं को पादरी बनना चाहिए या नहीं, मुद्दा यह भी नहीं है कि तलाकशुदा औरत सामूहिक भोज में शामिल होती है या नहीं। अगर कोई मुख्य मुद्दा है तो वह यह कि मोक्ष के लिए क्रिश्चियनिटी को सर्वोपरि बताना। सर्वोपरि होने के चर्च के दंभ ने मानवता को हममें और उसमें बांट दिया है। इसलिए पूरी मानवता को लाभ प्रदान करने तथा अपने इस पोप पद को सही मायने में यादगार बनाने कि लिए कृपया इस अहितकर दावे को छोड़ दें कि आपका रिलिजन सभी धर्मों में विशेष है और सर्वोपरि है।

URL: Open Letter to Pope Francis From Maria Wirth

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