अगले सौ साल में ब्रम्हाण्ड में नया घर न खोजा तो कंप्यूटर करेंगे हम पर शासन!

प्रख्यात भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग अपनी मौत के सात माह बाद फिर चर्चा में हैं। हाल ही में उनकी आखिरी किताब ‘ब्रीफ आंसर्स टू ब्रीफ क्वेश्चंस’ प्रकाशित हुई है। ब्रम्हाण्ड के बारे में विश्व की समझ विकसित करने में हॉकिंग का विशेष योगदान रहा है। आखिरी किताब में वे कह गए हैं कि मानव सभ्यता को जीवित रहने के लिए पृथ्वी से बाहर यात्रा करनी ही होगी। हॉकिंग ने इस नई किताब में कुछ बड़े सवालों के जवाब देने का प्रयास किया है। ब्लैक होल के भीतर क्या है, क्या समय में यात्रा संभव है, क्या भगवान का अस्तित्व है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य क्या होगा, मानवता बचेगी या नहीं? ऐसे सवालों के जवाब हॉकिंग ने अपनी नई किताब में दिए हैं।

हॉकिंग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेज़ विकास पर चिंता जताते हुए किताब में लिखा है कि यदि ये पूर्ण रूप से विकसित होने दी गई तो मानव सभ्यता के नष्ट होने की पूरी आशंका दिखाई देती है। मशीनों को सोचने की शक्ति प्रदान करना मानव के लिए खतरनाक होगा। मशीने अपना विकास बहुत तेज़ गति से करेगी और मानव अपने धीमे जैविक विकास के चलते उनका सामना नहीं कर सकेगा। तकनीक को हम अपने लिए अच्छा या बुरा दोनों ही बना सकते हैं। एक बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी तरह विकसित हो गई तो दस प्रतिशत सम्भावना है कि वह खुद के विकास को छोड़कर मानव की सहयोगी बनकर रह पाएगी।

किताब का एक अध्याय ‘सुपर ह्यूमन्स’ के उदय पर लिखा गया है। आगामी तीन सौ वर्ष के भीतर जेनेटिक इंजीनियरिंग की सहायता से एक नई मानव प्रजाति का उदय होगा। इन्हे ‘सुपर ह्यूमन्स’ कहा जाएगा। हॉकिंग ने लिखा है कि ये ‘जेनेटिक एडिटिंग’ एक नए मानव को जन्म देगी। ये नया मानव कई बीमारियों से मुक्त होगा। वर्तमान में ही हम जेनेटिक बदलाव करने में सक्षम हो चुके हैं। आज मेडिकल साइंस के पास ‘CRISPR-Cas9 genome editing’ का अमोघ अस्त्र है।

इसकी मदद से हम मनुष्य की जीन में लक्ष्य के अनुसार बदलाव कर सकते हैं। जब आज ये स्थिति है तो आने वाले सौ वर्ष में क्या बदलाव होंगे, हम सोच भी नहीं सकते। ये बदलाव अत्यधिक धनिक या प्रभावशाली लोग ही कर सकेंगे। इससे आम मनुष्यों और सुपर ह्यूमन्स के बीच टकराव बढ़ेगा। हाकिंग के अनुसार जेनेटिक मोडिफाइड मानव सभ्यता दूसरे ग्रहों पर आबादी बसाने में सक्षम हो सकती है। सामान्य रूप से जन्मे मनुष्यों को बेकार करार दे दिया जाएगा और एक नई मानव सभ्यता सामने आएगी।

शारीरिक रूप से अपंग स्टीफन हॉकिंग बोल नहीं पाते थे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर बनी मशीन उनके विचारों को सम्प्रेषित करती थी। उस मशीन की बुद्धिमता थी कि मूक स्टीफन दुनिया से बातें कर पाते थे। हैरानी ये कि उसी तकनीक के पूर्ण विकसित हो जाने की आशंका स्टीफ़न को भयभीत करती थी। उन्होंने लिखा है कि अगले सौ साल में ये तकनीक पूरी तरह से मानव पर आधिपत्य कर लेगी। वे मशीनें इतनी बुद्धिमान होंगी कि किसी भी काम के लिए उनको मानवों की आवश्यकता नहीं होगी। इस बात का तगड़ा आधार इसलिए है क्योंकि अतीत में गूगल के एक प्रोजेक्ट ‘ऑटो एमएल ने आश्चर्यजनक रूप से खुद का ‘एएल चाइल्ड’ डेवलप कर लिया था।

हॉकिंग ने लिखा है कि ब्रम्हाण्ड में निश्चित रूप से एलियन लाइफ है। हमारे सामने चुनौती ये है कि उनसे सम्पर्क साधा जाए। यदि हमें उनसे संपर्क करने में देर होती है तो विकास में हम काफी पीछे रह सकते हैं। हमने अगले सौ साल में ब्रम्हाण्ड में नया घर न खोजा तो कंप्यूटर हम पर शासन करेंगे। हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि कंप्यूटर मानव सेवा करते रहे न कि हमे ही गुलाम बना लें। अगले पचास साल के भीतर हम जान जाएंगे कि धरती पर जीवन कैसे शुरू हुआ था। हम ये सीखेंगे कि बाहरी आकाशगंगाओं में जीवन का स्वरूप कैसा है।

स्टीफन अब हमारे बीच नहीं है। अपनी किताब में उन्होंने ये भी लिखा है कि ईश्वर कहीं नहीं है। उनका मानना है कि ब्रम्हाण्ड इतनी तेज़ी से विकसित हुआ था कि उसमे ईश्वर का कोई काम ही नहीं बचा होगा। हालांकि पूरब इस बात को नहीं मानता। पश्चिम भले ही न मानें लेकिन पूरब मानेगा कि हॉकिंग का शरीर अब नहीं है लेकिन उनकी चेतना यात्रा में है। इस यात्रा में उन्हें सबसे महत्वपूर्ण सवालों का जवाब मिल ही गया होगा। बाकी उनकी भविष्यवाणियां ध्यान देने लायक है। उन्होंने चेताया है कि पृथ्वी का मिजाज बहुत जल्द बदलेगा और मानव बड़ी चुनौती के सामने खड़ा होगा। मौसम परिवर्तन के बारे में एक भौतिक विज्ञानी की ये भविष्यवाणी सबसे महत्वपूर्ण है।

URL: Stephen Hawking final book: If we do not find new home in universe in next hundred years, computer will rule over us

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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