यूपीए सरकार ने शेखर गुप्ता और इंडियन एक्सप्रेस के साथ मिलकर रची थी भारतीय सेना को बदनाम करने की साजिश!

कांग्रेस पार्टी और उसकी यूपीए-2 सरकार अपने छुद्र स्वार्थ के लिए देश और सेना तक को दांव पर लगा चुकी है। यह घटना साल 2011-12 के उस समय की है जब सोनिया की मनमोहन सरकार की साख जमींदोज हो चुकी थी। मनमोहन सरकार चारों ओर से भ्रष्टाचार के मामले से घिर चुकी थी। वहीं दूसरी ओर अन्ना के आंदोलन से हिल चुकी थी। उसी समय यूपीए सरकार के चार कैबिनेट मंत्रियों ने शेखर गुप्ता और इंडियन एक्सप्रेस के साथ मिलकर एक साजिश रची थी। साजिश के तहत भारतीय सेना के तत्कालीन प्रमुख वीके सिंह पर मनमोहन सरकार की तख्तापलट करने की झूठी खबर इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित करवाई थी। यह खुलासा Sunday Guardian ने दो फरवरी को प्रकाशित अपनी स्टोरी में की है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने भी प्रेस वार्ता कर सनडे गार्जियन की उस रिपोर्ट की पुष्टि की है। इससे साफ है कि शेखर गुप्ता ने अपनी इस रिपोर्ट से न केवल देश को बदनाम किया बल्कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के साथ मिलकर भारतीय सेना को पाकिस्तानी सेना साबित करने का प्रयास किया था। संडे गार्जियन के खुलासे और शेखर गुप्ता और यूपीए सरकार के मंत्रियों की साजिश का खुलासा होने को लेकर इंडिया स्पीक्स डेली के संस्थापक संपादक ने त्वरित टिप्पणी करते हुए विश्लेषण किया है। आप भी इसे सुनिए और देश की सेना के खिलाफ साजिश करने वालों की चाल को समझिए…

मालूम हो कि साल 2011 के अंत और 2012 की शुरुआत में यूपीए-2 सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों ने इंटेलिजेंस ब्यूरो को अनौपचारिक तौर पर यह स्थापित करने को कहा था कि तत्कालीन आर्मी चीफ वीके सिंह के नेतृत्व में सेना ने मनमोहन सिंह सरकार की तख्ता पलटने का प्रयास किया था। आईबी के स्पष्ट रूप से मना करने के बावजूद इस काल्पनिक कहानी को साजिश के तहत मीडिया में लीक कर दी गई। फिर इंडियन एक्सप्रेस के तत्कालीन संपादक शेखर गुप्ता ने अपने आका के अनुरूप इस झूठी कहानी को मोदी सरकार के विदेश राज्यमंत्री वी के सिंह के खिलाफ उपयोग किया। ‘The January night Raisina Hill was spooked: Two key Army units moved towards Delhi without notifying Govt’ शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के माध्यम से शेखर गुप्ता ने विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह के खिलाफ अपना खुंदक भी निकाला, क्योंकि उन्होंने   अपने कई ट्वीट के माध्यम से शेखर गुप्ता की अकूत संपत्ति का पर्दाफाश किया था। इस घटना के बारे में भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमनियन स्वामी ने साल 2013 में ही कहा था कि 2012 में सेना द्वारा तख्तापलट की झूठी कहानी तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम और शेखर गुप्ता के बीच एक पंच सितारा होटल में खाने के दौरान तय हुई थी। ओबराय होटल में पी चिदंबरम और शेखर गुप्ता ने लंच करते समय यह साचिश रची थी।

ध्यान रहे कि शेखर गुप्ता के इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित झूठी कहानी में जिस दिन सेना के रायसिना हिल की तरफ कूच करने की बात कही गई है उस दिन जनरल वीके सिंह अपनी जन्मतिथि विवाद को सुप्रीम कोर्ट लेकर गए थे। इससे साफ है कि शेखर गुप्ता ने उस समय सोनिया गांधी की मनमोहन सरकार की चारों ओर हो रही किरकिरी से ध्यान भटकाने के लिए देश की सेना को बदनाम करने वाली यह फेक स्टोरी प्रकाशित की थी। मालूम हो कि जब इस फेक स्टोरी पर शेखर गुप्ता की किरकिरी होनी शुरू हो गई तब उसने कहा था ‘राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच शब्दों की लड़ाई पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, जहां तक इस स्टोरी की बात है तो मैं नहीं समझता कि इसे और कोई प्रामाणिकता की जरूरत है, अगर जरूरत है तो उसका स्वागत है। लेकिन इससे भी ज्यादा बहस की जरूरत है क्योंकि सरकार इसलिए इसे स्वीकार नहीं कर रही है क्योंकि जो हुआ वह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी।’

 

आपको याद है वह घटना…

साल 2012 की 17 जनवरी की वह सर्द भरी सुबह, जिसे शेखर गुप्ता ने चार अप्रैल 2012 को अपने इंडियन एक्सप्रेस में रायसिना हिल्स पर कब्जा करने के लिए सेना का कूच बताया था, जबकि सेना अपना सामान्य अभ्यास में संलग्न थी। शेखर गुप्ता ने हिसार और आगरा में हुए इस सेना के अभ्यास को मनमोहन सरकार के गिराने के लिए तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह के नेतृत्व में सेना का कूच बता दिया था। जबकि इसके बारे में आईबी पहले ही प्रधानमंभी को सारी सच्चाई बता चुकी थी।

उस दौरान इस प्रकरण को नजदीक से देखने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरों में कार्यरत स्रोत के मुताबिक यूपीए सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और नेता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को यह विश्वास दिलाने में सफल रहे कि सेना उनकी सरकार को गिराना चाहती है। इस भ्रम में आकर मनमोहन सिंह ने आईबी से इसकी जांच करने को कहा था। जांच के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने एक बार फिर अपनी रिपोर्ट में कहा कि सरकार गिराने की कोई बात ही नहीं है। क्योंकि कोई भी आर्मी चीफ तब तक ऐसा सोच भी नहीं सकता जब तक शीर्षस्थ अधिकारी उनके समर्थन में न हो। और जहां तक जनरल वीके सिंह की बात हो तो उन्होंने कभी ऐसा करने के बारे में सोचा भी नहीं। क्योंकि उनकी ओर से कहीं भी कोई इशारा तक नहीं मिला। आईबी की यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री के साथ साझा भी हुई जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि सरकार गिराने की कोई बात कभी हुई ही नहीं।

इतना सबकुछ होने के बाद भी साल 2012 के चार अप्रैल को शेखर गुप्ता ने इंडियन एक्सप्रेस में । ‘The January night Raisina Hill was spooked: Two key Army units moved towards Delhi without notifying Govt’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित कर दी। अपने रिपोर्ट में उसने आरोप लगाया कि 16 जनवरी की रात मनमोहन सिंह की सरकार की तख्तपलट करने के लिए जनरल वीके सिंह के नेतृत्व में सेना की दो टुकड़ी हिसार और मथुरा से दिल्ली की रायसिना हिल के रवाना हुई थी।

गौर हो कि वीके सिंह का सेना प्रमुख का कार्यकाल मार्च 2010 से लेकर मई 2012 तक का था। फिर भी शेखर गुप्ता ने उन्हें बदनाम करने के लिए मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रचने का झूठा आरोप लगा दिया।

शेखर गुप्ता ने कश्मीर में भी भारतीय सेना को किया था बदनाम 

कांग्रेस खासकर गांधी परिवार के चाकर के रूप में अपनी ड्यूटी करने वाला शेखर गुप्ता पहले से ही भारतीय सेना को बदनाम करता रहा है। इस घटना से पहले भी उसने इंडियन एक्सप्रेस में भारतीय सेना के खिलाफ स्टोरी कर भारतीय सेना पर अपने फंड का उपयोग तत्कालीन ओमर अब्दुल्ला सरकार को गिराने में करने का आरोप लगाया था। यह स्टोरी भी उसने नरेंद्र मोदी के साथ वीके सिंह के मंच साझा करने के दूसरे दिन छापी थी। 19 सितंबर 2011 को वीके सिंह ने मोदी के साथ मंच साझा किया था और 20 सितंबर को शेखर गुप्ता ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की थी। अपनी रिपोर्ट में उसने भारतीय सेना पर अलगाववादियों का साथ देने का आरोप लगाया था। इस मामले को बाद में पाकिस्तान ने भी खूब उछाला था। इससे साफ है कि शेखर गुप्ता ने जनरल वीके सिंह से अपना खुंदक निकालने के लिए देश तक को बदनाम करने से बाज नहीं आया।

जनरल वीके सिंह ने शेखर गुप्ता की अकूत संपत्ति का किया था पर्दाफाश

शेखर गुप्ता जनरल वीके सिंह से तभी से चिढ़ा हुआ है जब से उसकी अकूत संपत्ति का पर्दाफाश हुआ था। यह पर्दाफाश कोई और नहीं बल्कि जनरल वीके सिंह ने ही अपने ट्वीट के माध्यम से किया था। उन्होंने बताया है कि कैसे दक्षिण दिल्ली के सामान्य मोहल्ले के एक महल घर में रहने वाला शेखर गुप्ता इंडियन एक्सप्रेस के संपादक और सीई बनते ही करोड़ों रुपये में खेलने लगा।

उन्होंने ही खुलासा किया कि किस प्रकार शेखर गुप्ता ने अपनी एक कंपनी खोलकर कांग्रेस के दागी नेताओं को उसमें शरण दी। उसकी कंपनी कॉमनवेल्थ घोटाले में भी संलिप्त थी। वीके गुप्ता ने एक बार कहा था कि शेखर गुप्ता का सारा काला चिट्ठा सबूत के साथ उनके पास है कि कैसे उसने चाणक्यपुरी के मालचा रोड पर 55 करोड़ रुपये का बंगला खरीदा। लेकिन सारे सबूत वे तभी देंगे जब इंडियन एक्सप्रेस उस पर स्टोरी करे और छापे।

उन्होंने बताया कि शेखर गुप्ता ने किस प्रकार दिल्ली में दो-दो जगह फार्म हाउस ले लिया। जनरल वीके सिंह ने साल 2013 में ट्वीट कर उसका सारा काला चिट्ठी खोल दिया था।

शेखर गुप्ता ने अपनी पत्नी नीलम जॉली के साथ ग्रीनपाइन एग्रो प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी 2002 में खोली थी लेकिन कई सालों तक इसका कोई लेखा जोखा दिया ही नहीं। यही वह कंपनी थी जो कॉमनवेल्थ घोटाला में शामिल थी। बाद में उसने साल 2010 में इस कंपनी को बंद कर दिया। लेकिन इतने दिनों की कंपनी की इसने रिटर्न एक बार फाइल की। 2003 से लेकर 2009 तक की रिटर्न सिर्फ एक बार फाइल की ।

अब जब संडे गार्जियन ने इंडियन एक्सप्रेस और शेखर गुप्ता की सारी साजिश का पर्दाफाश कर दिया है तो ऐसे में उस समय शेखर गुप्ता के साथ देने वाले पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और पी चिदंबरम को आगे आकर जवाब देना चाहिए कि आखिर उनलोगों ने देश की सेना की साख पर इस प्रकार बट्टा लगाने की साजिश क्यों की थी।

शेखर गुप्ता की झूठ की पोल खुलने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पार्टी से जवाब देने को कहा कि आखिर क्यों आईबी रिपोर्ट के बाद भी यूपीए सरकार के तत्कालीन मंत्रियों ने भारतीय सेना के खिलाफ नकारात्मक विमर्श चलाने की साजिश की थी? इस मामले में भाजपा ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी से जवाब देने को कहा है। भाजपा प्रवक्ता ने इस सारी साजिश का सूत्रधार राहुल गांधी और सोनिया गांधी को बताया है। उनका कहना है कि उस समय में गांधी परिवार के यही दो सदस्य सारे फैसले लेते थे। इसलिए इस साजिश में हो न हो राहुल गांधी भी शामिल हो। उन्होंने कहा कि भारत जैसी प्रतिष्ठित सेना की तुलना पाकिस्तानी से करना या वैसा दिखाना अपने आप में एक गंभीर मसला है। जिसकी जांच होनी जरूरी है।

स्वामी ने किया था पी चिदंबरम और शेखर गुप्ता की साजिश का खुलासा

साल 2012 में मनमोहन सरकार की सेना की तख्ता पलटने की झूठी खबर का पर्दाफाश भाजपा नेता सुब्रमनियन स्वामी ने साल 2013 में ही कर दिया था। उन्होंने कहा था कि इस झूठी खबर की साजिश दिल्ली के पंच सितारा होटल ओबराय में की गई थी। स्वामी ने कहा कि साल 2012 की उस घटना की योजना तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम और इंडियन एक्सप्रेस के संपादक शेखर गुप्ता ने बनाई थी। दोनों ने ओबराय होटल में लंच पर यह साजिश रची थी। ओबराय होटल के कर्मचारी ने स्वामी को बताया था कि पी चिदंबरम और शेखर गुप्ता ने ही लंच के समय इस झूठी कहानी को प्रकाशित करने का फैसला किया था। स्वामी ने उस समय ट्वीट कर यह भी जानकारी दी थी ओबराय होटल के सीसीटीवी कैमरे में वह फुटेज देखा जा सकता है। स्वामी ने यह खुलासा तब किया था जब यूपीए-दो सरकार के तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर को सही बताया था।

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