चाँद पर जाकर अमेरिका के ‘मून मिशन’ की सच्चाई जांचेगा रूस

रूस को शक है कि अमेरिका कभी चाँद पर गया होगा। इसका पता लगाने के लिए रूस चाँद पर जाने की योजना बना रहा है। रूस की इस घोषणा से ‘स्पेस पॉलिटिक्स’ गरमा गई है। इस घोषणा ने उस पुराने सवाल को कुरेद दिया है। कई भौतिक विज्ञानियों ने इस बात कई सवाल किये थे, जिनका जवाब नासा को देना मुश्किल हो गया था। वे सवाल फिर उठ खड़े हुए हैं।

20 जुलाई 1969 को नील आर्मस्ट्रांग ने अपना बायाँ पैर चाँद की निर्जन धरती पर रखा था। चाँद पर हवा और पानी नहीं है इसलिए आर्मस्ट्रांग के पैरों के निशान हमेशा मौजूद रहेंगे। आज से सौ साल बाद भी ये चिन्ह बने रहेंगे। जितने लोग मानते हैं कि अमेरिका चाँद पर कदम रख चुका है, उतने ही लोग मानते हैं कि अमेरिका कभी चाँद पर नहीं गया। शनिवार सुबह रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमोस के चीफ दिमित्री रोगोजिन ने ट्विटर पर एक विडियो पोस्ट कर कहा, ‘हमने यह लक्ष्य तय किया है कि चांद तक उड़ान भरें और पता लगाए कि वाकई अमेरिका वहां पहुंचा था या ये उसका एक धोखा था। रूस जब चाँद पर जाएगा तो विज्ञान के नियमों के मुताबिक आर्मस्ट्रांग के पैरों के निशान उसे मिलना चाहिए।

रूस को जो शंका है, वह कई लोग पहले ही प्रकट कर चुके हैं। इन लोगों का कहना है कि एयरोनॉटिकल इंजीनियर और अमेरिकी सैनिक पायलट नील आर्मस्ट्रांग कभी चंद्रमा पर उतरे ही नहीं। विशेषज्ञ दावा करते हैं कि चांद पर जाने का ये सारा खेल किसी फिल्म स्टूडियो में रचा गया था। कई तर्क दिए गए। जैसे अमेरिकी ध्वज चाँद के वायुरहित वातावरण में लहराता कैसे दिख रहा है। जब आर्मस्ट्रांग के पैरों के निशान चाँद पर मौजूद है तो चार टन वजनी स्पेस शिप के निशान क्यों नहीं बने। तस्वीरों में कहीं भी तारें नज़र नहीं आ रहे हैं।

इन सबमे सबसे पुख्ता कारण है मून मिशन के ‘ब्लू प्रिंट’। मिशन को फर्जी बताने वालों का शक्तिशाली तर्क ये है कि आज तक नासा ने मून मिशन के ब्लू प्रिंट दुनिया के सामने नहीं रखे। कई साल से नासा से इस बारे में पूछा जाता रहा लेकिन उसने कभी इस बारे में कोई बात नहीं की। दिमित्री रोगोजिन बिलकुल वाजिब सवाल उठा रहे हैं। उनका यही कहना है कि पिछले पचास साल से उठ रहे सवालों का जवाब अमेरिका क्यों नहीं देता। दरअसल अमेरिका के इस दावे की जाँच की मांग 2015 से ही उठने लगी थी। रूस जानता है कि ‘स्पेस ट्रेड’ में अमेरिका को पछाड़ने के लिए ये जाँच अमोघ अस्त्र सिद्ध हो सकती है।

सन 2015 में नासा के फ्लाइट कंट्रोलर और इंस्ट्रक्टर रॉबर्ट फ्रॉस्ट ने बड़ा रोचक खुलासा किया। उन्होंने कहा ‘हम चाँद पर पहुँचने की तकनीक खो चुके हैं’। महाशक्ति अमेरिका की एजेंसी का ये बयान अविश्वसनीय था। Saturn V rocket रॉकेट में तीन लाख पुर्जे थे। नासा का कहना है कि पुर्जे उन्होंने नष्ट कर दिए। वह तकनीक नष्ट कर दी गई लेकिन ब्लू प्रिंट के बारे में नासा कुछ नहीं बता सका। अमेरिका के गोलमोल जवाब कभी विशेषज्ञों के गले नहीं उतर सके। अब रूस की नई घोषणा से अमेरिका मुश्किल में है। यदि रूस वाकई चाँद पर पहुँचने में कामयाब हो गया तो 20 जुलाई 1969 के इतिहास को बदलना पड़ सकता है।

URL: Russia’s space agency chief says planned mission will verify U.S. moon landings
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Vipul Rege

Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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