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जांच में कैंसर की पुष्टि नहीं हुई, फिर भी उस महिला का एक स्तन निकाल दिया! लूट के अड्डे बन रहे हैं भारत के अस्पताल!

कुछ दिन पहले कैंसर के इलाज का एक अजीब सा केस सामने आया, जिसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। सोचा ! आप सभी को अवगत कराऊँ तो हो सकता है किसी का भला हो जाये।वैसे तो कैंसर सम्बंधित हर दिन नये-नये आश्चर्यचकित करने वाले केस आते हैं।

यह एक 42 वर्षीय महिला का केस है। कुछ महीनों पहले उनके स्तन में एक गाँठ का एहसास हुआ। 12 मार्च की एफ एन ए सी (FNAC) रिपोर्ट में फाइब्रोसिस्टिक डिसीज़ बताया। उसके बाद एक सरकारी अस्पताल ने – एक गोली विटामिन-ई, एक गोली प्राइमरोज़ आयल और दो गोली गैस की खाने की सलाह दी। उसके बाद देशव्यापी लॉकडाउन लग गया। दुबारा मई में अस्पताल जाना सम्भव हुआ। यहाँ डॉक्टरों ने इसे कॉम्प्लेक्स सिस्ट एंड डीजनरेटिव एडेनोमा बताया क्योंकि यह धीरे-धीरे बढ़ रहा था और दर्द भी हो रहा था। डॉक्टरों ने तत्काल गाँठ निकालने की सलाह दी और उन्होंने 25 मई को गाँठ को निकलवा दिया। 4 जून को गाँठ की बायोप्सी रिपोर्ट जिसमें लिखा हुआ है- “इनफिलट्रेटिंग डक्ट कार्सिनोमा” यानि कि कैंसर बताया गया। 13 जून को पेटसिटी स्कैन (PET CT Scan) किया गया जिसमें शरीर में किसी भी प्रकार के कैंसर को नाकार दिया गया।परन्तु फिर भी 21 जून को एक तरफ़ का स्तन निकाल दिया गया। जिसकी बायोप्सी रिपोर्ट 2 जुलाई को आई जिसमें लिखा है- “नो एवीडेन्स ऑफ डी सी आई एस ऑर रेसीडुअल मैलिगनेन्सी (No evidence of DCIS or residual malignancy)” यानी कि कहीं भी कैंसर नहीं मिला। उसके बाद 11 जुलाई को पहले निकाले गये सिस्ट के ब्लॉक की इम्यूनोहिस्टोकेमेस्ट्री रिपोर्ट करवाई गई और यह बताया गया कि यह “ट्रिपल नेगेटिव कैंसर” है इसलिये 8 कीमो देने पड़ेंगे जिससे भविष्य में दुबारा कैंसर ना हो जाये। पेशेन्ट को एक कीमो दिया जा चुका है।

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इस केस को समझने के बाद मेरे पास कुछ सवाल हैं जिनका उत्तर नहीं मिला –

प्रश्न 1- एफ एन ए सी की रिपोर्ट में फाइब्रोसिस्टिक डिसीज बताया गया पर मई में बिना किसी अन्य जॉंच के उसी सिस्ट को डॉक्टरों ने कॉम्प्लेक्स सिस्ट और डीजनरेटिव एडेनोमा कह कर गॉंठ को निकाल दिया?

प्रश्न 2- एफ एन ए सी की रिपोर्ट में फाइब्रोसिस्टिक डिसीज बताया गया परन्तु सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने महज़ एक गोली विटामिन-ई, एक गोली प्राइमरोज आयल की और दो गैस की गोली क्यों दी? क्या फाइब्रोसिस्टिक डिसीज का यही इलाज है?

प्रश्न 3- पेटसिटी रिपोर्ट में शरीर में कहीं भी कैंसर ना पाये जाने के बावजूद पेशेन्ट का स्तन क्यों निकाला गया? यदि स्तन निकालना ही था तो गाँठ के साथ ही क्यों नहीं निकाला? दो बार सर्जरी क्यों की गई? क्या स्तन को बचाया जा सकता था?

प्रश्न 4- स्तन की बायोप्सी रिपोर्ट में कहीं भी कैंसर नहीं मिला फिर दुबारा पुराने ब्लॉक की जाँच करवा कर ट्रिपल नेगेटिव रिपोर्ट के आधार पर पेशेन्ट को 8 कीमो की सलाह क्यों दी गई? अभी तक की सभी रिपोर्ट के अनुसार कैंसर और ट्रिपल नेगेटिव इम्यूनोकेमेस्ट्री रिपोर्ट सिर्फ़ उस गाँठ में निकला जिसे सबसे पहले निकाल दिया गया था।उस गाँठ के अलावा अन्य किसी भी जाँच में शरीर में कहीं भी किसी प्रकार का कैंसर नहीं मिला।

प्रश्न 5- पेशेन्ट के केयर टेकर से पता चला कि कीमो इसलिये दिया जा रहा है कि आगे भविष्य में कैंसर ना हो। तो क्या कैंसर के इलाज में कीमो प्रीवेन्शन का भी काम करता है? और यदि ऐसा है तो हम सभी को प्रतिवर्ष नियमित रूप से कैंसर से बचाने के लिए कीमो क्यों नहीं दे रहे?

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मेरे विचारों से इस पेशेन्ट का स्तन निकालना और कीमो देना दोनों ग़लत हैं। जब तक लोग मूक दर्शक बनकर इस प्रकार के अत्याचार का विरोध नहीं करेंगे तब तक ये स्वास्थ्य के ठेकेदार अपनी मनमानी करते रहेंगे।

मेरा कहना यह है कि इलाज चाहें कहीं भी करवायें पर पहले पूरी तरह समझ लें और जो आपके सवालों के सही जवाब ना दे सके उससे कभी इलाज ना करवायें। किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि यदि आप किसी डॉक्टर या अस्पताल को छोड़कर दूसरी जगह जाते हैं तो डॉक्टर व अस्पताल का नुक़सान है। ज़रूरत समझें तो किसी जानकार से सेकन्ड ओपिनियन लें, परन्तु ध्यान रखें की सेकन्ड ओपिनियन किसी अन्य स्वास्थ्य प्रणाली में लें क्योंकि एक प्रकार की शिक्षा पाने वाले एक ही तरह का ओपिनियन देंगे।

कमान्डर नरेश कुमार मिश्रा
फाउन्डर ज़ायरोपैथी
फ़ोन- 1800-102-1357; +91-888-222-1817
Email: zyropathy@gmail.com
Website: www.zyropathy.com

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1 Comment

  1. Avatar Pawan11 says:

    सर सभी एलोपैथी के बहुत ही कम डाक्टर मरीज के सभी सवालों का जवाब देते है। जिससे मरीज रोग और उसका क्या उपचार हो रहा है उससे अनभिज्ञ रहता है और जब तक उसको समझ आता है केस बिगड़ चुका होता है।जब तक लोग एलोपैथी को प्राथमिकता देते रहेगें नतीजा यही होगा

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