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लोकतंत्र पर काला धब्बा, रिपब्लिक के एक हज़ार पत्रकारों पर एफआईआर

आईएसडी नेटवर्क। एक तरफ मुंबई में पुलिस कमिश्नर और रिपब्लिक भारत चैनल में घमासान मचा हुआ है और दूसरी ओर सुशांत सिंह राजपूत केस की जाँच रुकी हुई है। दो माह से अधिक समय से सीबीआई इस केस की जाँच कर रही है लेकिन अब तक एक भी औपचारिक बयान न आने से सुशांत वारियर्स की बेचैनी बढ़ती जा रही है।

मुंबई में राज्य सरकार ने रिपब्लिक भारत का गैरकानूनी ढंग से दमन करना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को देश ये जानकर भौचक्का रह गया कि मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक भारत के 1000 पत्रकारों-कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कर ली। चैनल से पैसों का हिसाब माँगा जा रहा है।

हिसाब भी ऐसा कि रिपब्लिक भारत के ऑफिस में प्रयोग होने वाले टॉयलेट पेपर का हिसाब माँगा जा रहा है। प्रतिशोध की भावना से की जा रही इस कार्रवाई से देशभर में आक्रोश है लेकिन इस मामले में बयान देने के लिए जिम्मेदार सूचना व प्रसारण मंत्रालय हमेशा की तरह मौन है।

मुंबई में अप्रत्यक्ष रुप से आपातकाल लागू हो गया है लेकिन कैबिनेट मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। देश ये देखकर हैरान है कि किस तरह एक राज्य सरकार अपनी शक्तियों का गलत प्रयोग कर एक चैनल को रौंदने की कोशिश की है।

ऑप इंडिया ने खुलासा किया है कि टीआरपी स्कैम में महत्वपूर्ण गवाहों को उनके घर जाकर धमकाया जा रहा है। गवाहों को रिपब्लिक के विरुद्ध गवाही देने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इसके बाद केंद्र सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग बढ़ गई है।

पत्रकारों के एक वर्ग ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि महाआघाडी सरकार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को इस मामले को लेकर मुंबई पुलिस कमिश्नर को चेतावनी दी थी लेकिन कमिश्नर ने तो अगले दिन 1000 पत्रकारों पर एफआईआर करवा दी।

शुक्रवार का दिन भारतीय लोकतंत्र पर एक धब्बे की तरह याद किया जाएगा, जब नागरिकों की आवाज़ उठाने वाले चैनल पर इस तरह शर्मनाक कार्रवाई की गई है। सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर तीखा विरोध शुरु कर दिया गया है।

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Vipul Rege

Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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