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Category: भाषा और साहित्य

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हिंदी कविता ‘जीवन मरण के मध्य’!

मैंने बिखेरी हैं, सांसें हवाओं में थोड़ी-थोड़ी! एक उम्मीद के साथ, कि कोई तो बटोर लेगा! अंजुरी भर फिर बिखेर देगा अपने बाद फिजाओं में! ताकि जीवन चलता रहे, इस लेन-देन के मध्य आखिर!...

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न वहां मेरा घर है, न वहां मेरा गांव है।

नीले आसमान के नीचे, सुनसान छत पर, भरी दोपहरी में, एकदम से अकेला, हवा की सांय-सांय जब कानों से टकराती है, तो एहसास होता है, यह गांव है, कोलाहल से दूर, यहां सुकून की...

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सुनो कुछ तो कहता है गोधरा?

27 फ़रवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में मानवता शर्मशार हुई, जब एक संप्रदाय विशेष ने गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में 59 रामभक्तों को जिंदा फूंक दिया गया था, जिसमें 25 महिलाएं, 19...

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नाम तुम्हारे गीत लिखूँगा, तुम को मन का मीत लिखूँगा!

जन मानस में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का अंदाजा सिर्फ इस बात से किया जा सकता है कि उन पर कविताओं का एक दौर सा चल पड़ा है, नोट बंदी जैसे साहसिक फैसले के...

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हिंदी का बाज़ार बढ़ रहा है, लेकिन एक खास विचाधारा ने हिंदी साहित्य को मृतप्राय बना दिया है!

सोनाली मिश्रा। एक बार फिर से साहित्य अकादमी सम्मानों की घोषणा हुई है और एक बार फिर से उन्हें विवादों में घसीट लिया गया है। हालांकि विवादों के बिना पुरस्कार और सम्मान याद नहीं...

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