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Category: भाषा और साहित्य

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सुभद्रा

“सुभद्रा” राधाकृष उनियाल जेसिकालाल मर्डर मेंमनु का जेल जानाबाप के रसूख सेजमानत पर छूटनारेस्टुरेंट में फिर फसाद करनाऔर वापिस जेल जानातथा माँ को याद करना अख़बार की सुर्खियों में था किन्तु प्रश्न उठता हैकि...

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‘विरह-शतक’ से कुछ काव्य-कुसुम

मेरे द्वारा विरचित ‘विरह-शतक’ से कुछ काव्य-कुसुम : कमलेश कमल सौम्य मुखमुद्रा, रूप-कौमुदीअभंग, अकथ शोभा-विस्तारपारिजातगुच्छ की श्री धारणामन-घुँघरुओं की नित झंकार (81) पुष्पभार से नमित वृन्त सीप्रगल्भ-रूपसी सुकोमल बालास्वर्णगात्र की मादक गंध औमधुर कौमार्य...

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ये विश्वनाथकारीडोर है

अवधेश दीक्षित| येविश्वनाथकारीडोर है जी हुजूर !पुरातन है,संस्कृति की राजधानी है ,दुनियां का आकर्षण हैयुगों- युगों से भोलेनाथ का रहाअब ये ‘चौकीदार’ जी का शहर हैन ‘निगम’ को पता हैन ‘प्राधिकरण’ को खबर हैअधिकारी...

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तलाश

तलाश,पंकज कुमार सिन्हा तू जिंदगी कीतलाश हैमेरी रूह कीतू प्यास हैआज भीतेरे लिएआंखें मेरीउदास है तुझे ढूंढतारहा नजरहर गली डगरहर मोड़ परतुझे दे रहाआवाज दिलतू है कहांहै किसे खबरजब भी कोईआहट हुईदिल में एकहलचल...

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अपमान और सत्य

अपमान और सत्य अनुपमा चतुर्वेदी तुम हो योगी बाबा अधर्मीकहाँ ज्ञानी हो सकते होभगवा पहन कर घूमो भैयाकहाँ डॉक्टर से लड़ते हो ? चाहे जितने पेपर्स लिख लोचाहे जितने अनुसंधान कर लोऔषधि निर्माण का लाइसेन्स है?वैज्ञानिक...

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बचपन

बचपन पंकज कुमार सिन्हा क्या दुनिया थी बचपन काखिलौने खेल छूटपन काछुपा छुपी मै छुप जातेकभी चक्के को दौड़ातेघड़ी वो ताड़ के पत्तेचबाए पान लीची केबेपरवाह दौड़ पड़ते थेकभी साढ़ों के हम पीछेकभी बतू...

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शब्द की नाव में , भाषा की नदी का सौंदर्य और बिंब विधान रचने वाले अरविंद कुमार अब नहीं रहे

दयानंद पांडेय मेरे मानस पिता , मेरे गुरु , शब्द-साधक , हिंदी थिसारस के प्रणेता , संपादक अरविंद कुमार देह से भले गए हैं पर हैं तो हम सब के साथ ही। सर्वदा रहेंगे।...

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मेरे द्वारा विरचित विरह-शतक से कुछ काव्य-कुसुम

कमलेश कमल. उल्लसित कंठ से करूँ अमियप्रगल्भ-प्रभा का यशोगानतुम उर्वशी, तुम उर्मिला हे प्रियतेरा सबसे गर्वित मान (74) भूल कभी सकता हूँ क्याविरह-विदग्ध विषम यह पीड़ानयनों से मिट सकती है क्यातेरे सुभ्रुवों की कन्दुक-क्रीड़ा...

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औरत का हौसला

कमलेश कमल. औरत में ख़ून की कमी हो सकती हैहौसले की नहींघर या बाहररसोई या बिस्तरकहीं वह होती नहीं कमतर छूटे अपनोंऔर टूटे सपनों से भीनहीं टूटती औरतसब कुछ झोंकघर बसाती-सजाती हैऔर तो औरघिसती...

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प्रभु जी तुम दीपक हम बाती, जाकी ज्योति बरै दिन-राती’ का वास्तविक अर्थ!

कमलेश कमल. कबीर के समकालीन ही बनारस में एक ऐसे समदर्शी संत हुए, जिनके भक्ति परक अवदान पर तो कार्य हुआ है, लेकिन बौद्धिक-चिंतन और समतामूलक समाज के स्थापन हेतु प्रयासों पर अपेक्षाकृत कम...

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हिंदी कविता: भरी दुनिया में मैं अकेला हूं!

इस भरी दुनिया में अकेला हूं,पुस्तकों से मेरी यारी है,पुस्तकें ही छोड़ कर,गुजर जाना चाहता हूं,इस भरी दुनिया में हां अकेला हूं। सुन रहा हूं हर ओर का शोर,बह रहा हूं बस अपनी ओर,अपने...

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वामपंथी जहर के खिलाफ साहित्य अमृत का रजत जयन्ती अंक

गत वर्ष एक वामपंथी साहित्यकार ने एक पत्रिका के विमोचन के अवसर साहित्यअमृत पत्रिका पर अत्यंत ही उपहासजनक टिप्पणी की थी कि पत्रिका का स्तर बनाए रखना, नहीं तो छप तो साहित्य अमृत भी...

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हिंदी को सेक्युलरिज्म से मुक्त करने की शपथ लें

हिंदी दिवस के नाम पर आज काफी लिखा जाएगा तथा कई षड्यंत्रों से हिंदी को जनता से दूर करने वाले आज फिर से इस दिवस पर आंसू बहाएंगे! मगर वह आज के दिन हिंदी...

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प्रेमचंद के पैरों की धूल भी आप नहीं हैं संजय सहाय!

वह पत्रिका हिंदी साहित्य की सबसे प्रगतिशील पत्रिका मानी जाती है. हिंदी साहित्य में विमर्श के आरम्भ के लिए पूरा साहित्यिक समाज हंस पत्रिका का ही मुंह ताकता है. वह हंस को एक ऐसी...

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यह हिन्दू फासीवाद नहीं पाठकों का जागरण काल है

यह वर्ष वैसे तो कई चीज़ों के लिए जाना जाएगा, मगर फिर भी एक और चीज़ के लिए यह जाना जाएगा, वह है साहित्य का दोगले रूप का और निखर कर सामने आना। इन...

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गरीबी पर लिखी शायरी लोगों को खूब रुलाती है

गरीबी पर लिखी शायरी लोगों को खूब रुलाती है, और शायर का जमीर यूं ही बंजर बना रहता है! देख लीजिए, जावेदों और गुलज़ारों का जीवन,उनकी बेगमों का दर्द और पीड़ा और उनका अभिजात...

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जो भारत की बर्बादी के नारे लगाएं

तन पर भले न हो कपड़ा, मानवता की रक्षा इनका धर्म है! ये जमाती नहीं, जो गद्दारी करें, विक्टिम कार्ड खेलें, और भ्रष्ट नौकरशाहों से, अपनी जिहाद के पक्ष में चिट्ठी लिखवाएं! ये वनवासी...

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यह अंग्रेजी की भूलभुलैया

यह दुनियाभर के देशों से भारत के व्यापार के आंकड़े है। इन देशों में से ऐसे मुश्किल से 5 – 6 देश ही होंगें जिनकी भाषा अंग्रेजी होगी और इनसे हमारे कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार...

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नयनों ने देखा मधुर स्वप्न

नयनों ने देखा मधुर स्वप्न, सुंदर धरा अद्भुत उपवन। देश मेरा भारत महान, जहां बसते हैं सबके प्राण। ना कोई लड़ाई, ना ही कोई द्वेष, ना ही किसी ने डाला हो दिखावे का भेष।...

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ऐसे समय में जब अंग्रेजी जैसी विदेशी भाषा का वर्चस्व बढ़ता ही जा रहा है, हमारी हिंदी लहरों की तरह अनवरत समृद्धि की तरफ अग्रसर है!

एक डोर में सबको जो है बाँधती वह हिंदी है, हर भाषा को सगी बहन जो मानती वह हिंदी है। भरी-पूरी हों सभी बोलियां यही कामना हिंदी है, गहरी हो पहचान आपसी यही साधना...

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