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Category: भाषा और साहित्य

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प्रेमचंद के पैरों की धूल भी आप नहीं हैं संजय सहाय!

वह पत्रिका हिंदी साहित्य की सबसे प्रगतिशील पत्रिका मानी जाती है. हिंदी साहित्य में विमर्श के आरम्भ के लिए पूरा साहित्यिक समाज हंस पत्रिका का ही मुंह ताकता है. वह हंस को एक ऐसी...

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यह हिन्दू फासीवाद नहीं पाठकों का जागरण काल है

यह वर्ष वैसे तो कई चीज़ों के लिए जाना जाएगा, मगर फिर भी एक और चीज़ के लिए यह जाना जाएगा, वह है साहित्य का दोगले रूप का और निखर कर सामने आना। इन...

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गरीबी पर लिखी शायरी लोगों को खूब रुलाती है

गरीबी पर लिखी शायरी लोगों को खूब रुलाती है, और शायर का जमीर यूं ही बंजर बना रहता है! देख लीजिए, जावेदों और गुलज़ारों का जीवन,उनकी बेगमों का दर्द और पीड़ा और उनका अभिजात...

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जो भारत की बर्बादी के नारे लगाएं

तन पर भले न हो कपड़ा, मानवता की रक्षा इनका धर्म है! ये जमाती नहीं, जो गद्दारी करें, विक्टिम कार्ड खेलें, और भ्रष्ट नौकरशाहों से, अपनी जिहाद के पक्ष में चिट्ठी लिखवाएं! ये वनवासी...

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यह अंग्रेजी की भूलभुलैया

यह दुनियाभर के देशों से भारत के व्यापार के आंकड़े है। इन देशों में से ऐसे मुश्किल से 5 – 6 देश ही होंगें जिनकी भाषा अंग्रेजी होगी और इनसे हमारे कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार...

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नयनों ने देखा मधुर स्वप्न

नयनों ने देखा मधुर स्वप्न, सुंदर धरा अद्भुत उपवन। देश मेरा भारत महान, जहां बसते हैं सबके प्राण। ना कोई लड़ाई, ना ही कोई द्वेष, ना ही किसी ने डाला हो दिखावे का भेष।...

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ऐसे समय में जब अंग्रेजी जैसी विदेशी भाषा का वर्चस्व बढ़ता ही जा रहा है, हमारी हिंदी लहरों की तरह अनवरत समृद्धि की तरफ अग्रसर है!

एक डोर में सबको जो है बाँधती वह हिंदी है, हर भाषा को सगी बहन जो मानती वह हिंदी है। भरी-पूरी हों सभी बोलियां यही कामना हिंदी है, गहरी हो पहचान आपसी यही साधना...

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हिंदी कविता- इस पथ पर कौन मिलेगा?

इस पथ पर कौन मिलेगा? साथी यह तय कौन करेगा? आज मिला जो वह मेरा है, कल आशाओं का फेरा है! जीवन यह बहता दरिया है, जो साथ बहेगा याद रहेगा! इस पथ पर...

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कविता- तय कर लो, जाना किधर है…

तय कर लो! जाना किधर है एक तरफ काँटों का रास्ता पर तरफ दूसरी उजाले की चमक है सोच लो चलना किधर है एक तरफ नरम घास सा रास्ता तरफ दूसरी अँधेरे का असर...

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हिंदी कविता- ‘बुर्जुआ’

लाखों बार कुर्बान ऐसे ‘बुर्जुआ’ पर…. बाजार से गुजर रहा था, तुम आगे थी, और मैं पीछे। देखा, एक गुलाब वाला बुजुर्ग गुमशुम-सा बैठा था, उसका बेटा गुलाब समेटने की तैयारी में था, सोचा...

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हिन्दी भाषा को ‘हिन्दी दिवस’ की कोई आवश्यकता नहीं है।

हिन्दी की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसमें वही लिखा जाता है जो उच्चारित होता है। इसमें हर ‘ध्वनि’ के लिए अपना एक शब्द है। दूसरी भाषाएं हिन्दी जितनी धनिक नहीं है। तीन...

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भारत में हिन्दी को स्थापित करने की झूठी कवायदें चल रही हैं वहीँ हिंदी गीत दुनिया में हमारी भाषा का बढ़ा रहे हैं मान!

पिछले दिनों भारत के राष्ट्रपति जब प्राग पहुंचे तो एक घटना ने सबका ध्यान खींच लिया। कोविंद दम्पति यहाँ भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित पार्टी में शिरकत करने पहुंचे। यहाँ उनके स्वागत में हिन्दी फिल्म...

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कामरेड कथा…लव,सेक्स और क्रान्ति!

अतुल कुमार राय। अभी पुष्पा को जेएनयू आये चार ही दिन हुए थे कि उसकी मुलाक़ात एक क्रांतिकारी से हो गयी। लम्बी कद का एक सांवला सा लौंडा। ब्रांडेड जीन्स पर फटा हुआ कुरता...

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कविता-आज जाने का है क्षोभ बड़ा, कल आने का है विश्वास ‘अटल’ !

बिरले ही होते हैं जिनके लिए शब्द स्वत फूटते हैं, आज मन उद्वेलित है ‘अटल’ जी को मेरी तरफ से अनंत ज्योति में विलीन होने पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि… मृत्यु मौन किन्तु ‘अटल’ है, आती...

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कविता- दुःख नहीं स्वीकार करो, मृत्यु से भी प्यार करो!

दुःख नहीं, स्वीकार करो, मृत्यु से भी प्यार करो! एक छोर पर जीवन है, दूसरी छोर पर मौत खड़ी! जीवन जब जी भर कर जिया, मृत्यु को भी भरपूर जियो! मृत्यु एक अटल सत्य...

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अटल बिहारी वाजपेयी की कविता: ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ, लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ’

ठन गई! मौत से ठन गई! जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। मौत...

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अटल बिहारी वाजपेयी की कविता: ‘सुनो प्रसून की अगवानी का स्वर उन्चास पवन में’!

पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित सचित्र साप्ताहिक अभ्युदय में प्रकाशित अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविता, 11 फरवरी 1946 नौ अगस्त सन बयालीस का लोहित स्वर्ण प्रभात, जली आंसुओं की ज्वाला में परवशता...

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कहानी…सपेरा संपादक और नागिन एंकर!

सांप-छुछुंदर नचाने वाले एक ‘सपेरे संपादक’ को आज लोकतंत्र की बड़ी चिंता है! महोदय जानता हूं, कम उम्र महिला रिपोर्टरों को आप किस ‘बीन’ पर ता-थैया कराया करते थे? यह एक न्यूज चैनल के...

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हिंदी कविता : चिदाकाश!

हम चारों तरफ आकाश से घिरे हैं, जो है और जो नहीं है! है उसके लिए जो जानता है, नहीं है उसके लिए जो तर्क करता है! आकाश यानी शून्य! जीवन की गति ही...

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जिसे तुलसी, सूर का ज्ञान नहीं वह प्रकाशक है! सोचिए हमारी हिंदी के प्रति वह कितनी नफरत से भरी है!

किताबें इंसानों के लिए सबसे बड़ा दोस्त बताई जाती हैं, और हैं भी! जो भी उत्तर नहीं मिल रहा हो, वह आपको झट से किसी न किसी किताब में मिल जाएगा। आज किताबें ऑनलाइन...

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