‘लवयात्री’ फिल्म समीक्षा- बकवास से थोड़ी ज्यादा और बेवकूफी से थोड़ी कम!

निर्माता सलमान खान की फिल्म ‘लवयात्री’ गजब फिल्म है। इसे देखने के बाद दर्शक सूचनाओं के एक नए संसार में प्रवेश कर जाता है। उसे मालूम होता है कि नवरात्रि केवल गरबों और प्यार-मोहब्बत का त्यौहार है, नवरात्रि के पांडाल को आजकल गुजरात में ‘डांस ग्राउंड’ के नाम से जाना जाता है। इंग्लैण्ड में गोरी चमड़ी वाले गुजराती गरबे पसंद करते हैं। गुजरात के लिए उनका प्रेम इतना है कि ब्रिटिश पुलिस विभाग में ‘सु छे’ बोलने वाले गुजरातियों को रखा जाता है ताकि जब कभी भारत से ‘सूसू’ प्रेमिका को मनाने की कोशिश में लंदन में पकड़ा जाए तो ये गुजराती पुलिसवाले हाथ में डांडिया लेकर ‘सूसू’ की सुरक्षा करें। जीजा जी किसी के भी हो, बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, लिहाजा सलमान खान के लिए भी हैं। आयुष शर्मा को हीरो बनाने के लिए उन्होंने ‘लवयात्री’ बना डाली लेकिन दर्शकों को कौन समझाए जो एक शानदार फिल्म को घास नहीं डाल रहे हैं।

सुश्रुत को अपना नाम पसंद नहीं है क्योंकि वह एक ऋषि के नाम पर है इसलिए उसने अपना नाम ‘सूसू’ कर लिया है। वह युवाओं को गरबा सिखाता है लेकिन पूरी फिल्म में कुल जमा चार डांस स्टेप बार-बार दोहराता रहता है। कोहनियां नचाने के स्टेप को तीन सौ बार दोहराकर उसने विश्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। सूसू गरबों में जाता है लेकिन एक भी सीन में माँ की आराधना नहीं दिखाई गई।

निर्देशक इस तरह कहना चाहता है कि नवरात्रि गरबा करने और लड़कियां पटाने का त्यौहार है। इसका भक्ति भाव से कुछ सरोकार नहीं है। फिल्म में एक किरदार कहता भी है ‘मुझे तो नवरात्रि में हर दो घंटे में प्यार हो जाता है’। निर्देशक ने गुजरात का कल्चर दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जैसे मनीषा उर्फ़ मिशेल का लंदन वाला पिता उसे कहता है कि ‘तुम बड़ौदा वालों के पास एक ही काम रह गया है। एनआरआई लड़की पकड़ों नी शादी कर लो।’

बड़ौदा के युवा दर्शकों को फिल्म देखकर उनकी इस योग्यता के बारे में मालूम हुआ होगा और उन्होंने अपने अंदाज में सलमान खान और निर्देशक अभिराज मीनावाला की भूरी-भूरी प्रशंसा की होगी। फिल्म में एक अदद मामा जी हैं जो सूसू को लड़की पटाने के लेसन देते रहते हैं। निर्देशक के लिए मैं क्या कहूं। उनका काम इतना अधिक सराहा गया है कि पहले दिन फिल्म ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2.80 करोड़ की भारी कमाई कर डाली।

वरीना हुसैन के चॉकलेट के विज्ञापन में दिए गए ‘लुक्स’ बहुत काम आ गए। हर दूसरे शॉट में जब वे हंसती हैं तो मुझे चॉकलेट के विज्ञापन की वह लाइन याद आती थी ‘मिस मी क्लोज योर आइज, मिस मी’। फिल्म के मुख्य हीरो आयुष बहुत प्रतिभावान हैं। दो एक्सप्रेशंस और चार डांस स्टेप में वे पूरी फिल्म खींच ले जाते हैं/फिल्म के साथ खींचा जाते हैं।

फिल्म में एक उत्कृष्ट एक्शन दृश्य भी है। ये सरप्राइज है जो निर्देशक की बुद्धिमता का दर्शन करवाता है। मिशेल गरबा करते-करते एक डांडिया सूसू को धर देती है। डांडिया की मारक क्षमता ऐसी होती है कि अपना सूसू उछलकर दूर जा गिरता है। यहाँ निर्देशक की काबिलियत समझ में आती है। सलमान खान ने अपने जीजा जी के डेब्यू के लिए सही मानव चुना है। और ऐसे ही सरप्राइज फिल्म देखते हुए मिलते रहते हैं। क्या कहते हैं उसे ‘गूसबम्प्स’ होने लगते हैं।

बस अंत में इतना ही कहूंगा कि लवयात्री ‘बकवास से थोड़ी ज्यादा और बेवकूफी से थोड़ी कम है’। इस फिल्म पर ‘कलम गंभीरता से चलने से इंकार कर देती है। गंभीरता को भी प्रकट होने के लिए कुछ आयाम चाहिए होते हैं।’

URL: Producer Salman Khan’s movie Love yatri does not have any hope for box office

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Vipul Rege

Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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