Fake News Maker series- वामपंथी अखबार टेलीग्राफ और सरकारी एजेंसी पीटीआई चला रही थी त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव के खिलाफ अभियान! झूठ पकड़ा गया!

पिछले करीब दो दशक से त्रिपुरा में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार थी, लेकिन वहां से एक भी न्यूज दिल्ली और देश तक नहीं पहुंचती थी। कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री माणिक सरकार के समय त्रिपुरा की हालत बेहद खास्ताहाल थी, लेकिन दिल्ली की वामपंथी और अंग्रेजी मीडिया ने कभी वहां की दुर्दशा की रिपोर्टिंग नहीं की। लेकिन ज्यों ही त्रिपुरा की कम्युनिस्ट सरकार की हार हुई, बौखलाई वामपंथी और अंग्रेजी मीडिया ने भाजपा के नवनियुक्त मुख्यमंत्री बिप्लव देव को बदनाम व उनकी छवि खराब करने का संगठित अभियान शुरु कर दिया है। मुख्यधारा की मीडिया ट्रोल की तरह व्यवहार करते हुए उनके खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चला रही है। ऐसे ही एक अभियान को चलाते हुए मशहूर वामपंथी अखिबार द टेलीग्राफ और सरकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई पकड़ी गयी है! न्यूज एजेंसी एएनआईए ने भी मामला दर्ज कराया है कि उसका फेक एकाउंट बनाकर झूठी खबर प्रसारित किया जा रहा है।

आपको ज्ञात हो कि बंगाल से निकलने वाला द टेलीग्राफ आनंद बाजार पत्रिका समूह का अखबार है, जिसके मालिक अभीक सरकार कार्ड होल्डर कम्युनिस्ट हैं। इसी समूह का एबीपी न्यूज किस तरह से वामपंथी प्रापोगंडा चलाता है, यह सबके सामने हैं। यह वही The telegraph है, जिसने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के लिए Anti-National जैसे नेम कॉलिंग या ट्रॉल शब्द का इस्तेमाल अपने अखबार की कवर स्टोरी में किया था। इसी तरह सरकारी एजेंसी PTI में अभी भी कांग्रेसियों का कब्जा है। मोदी सरकार के साढ़े चार साल के बावजूद पीटीआई से कांग्रेसी संपादकों को विदा नहीं किया गया है, जिसका परिणाम समय-समय पर सरकार को बदनाम करने वाली झूठी खबर के रूप में मिलता रहता है।

वर्तमान घटनाक्रम में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव को बदनाम करने के लिए The telegraph और PTI ने उनके नाम पर झूठी खबर चला दी और सोशल मीडिया पर मौजूद कांगी-वामी पत्रकारों व कार्यकर्ताओं ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्टीकरण दिया कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने ऐसा कुछ नहीं कहा है, जो चलाया जा रहा है, लेकिन वामपंथी टेलीग्राफ और कांग्रेसी पत्रकारों के कब्जे वाली पीटीआई ने तो किया ही था मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए, इसलिए उन्होंने सही खबर को फिर भी नहीं चलाया और झूठ चलाते रहे!

इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने द टेलीग्राफ और पीटीआई को नोटिस जारी किया है। टेलीग्राफ को मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिखा कि आपने गलत तरीके से मुख्यमंत्री को कोट करते हुए खबर प्रकाशित की है। 30 अप्रैल को अगरतला के बुद्धमंदिर में मुख्यमंत्री बिप्लव देव ने जो कही भी नहीं, उसे भी उनके नाम पर टेलीग्राफ ने प्रकाशित कर दिया है। टेलीग्राफ ने मुख्यमंत्री को कोट करते हुए लिखा था-‘बुद्धा वॉक टू जापान’। मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिखा है कि वीडियो क्लिप साक्ष्य के रूप में उपलब्ध है, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा है कि भगवान बुद्ध ने भारतवर्ष में अहिंसा व शांति का संदेश दिया, जो यहां से निकल कर वर्मा, जापान, तिब्बत सहित पूरी दुनिया में आज फैला है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने ऐसा ही नोटिस पीटीआई को भी जारी किया है।

वहीं दूसरी ओर न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक रिपोर्ट दर्ज कराया है कि उसका फेक एकाउंट बनाकर उसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। एएनआई के फेक एकाउंट से भी त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव को बदनाम करने का संगठित अभियान मुख्यधारा की वामपंथी व अंग्रेजी मीडिया के ट्रोलर चला रहे थे।

दरअसल वामपंथी सरकार के दशकों तक चले शासन में हुए घपले-घोटाले पर कार्रवाई से बौखलाई वामपंथी व अंग्रेजी मीडिया ने मुख्यमंत्री बिप्लव देब पर दबाव बनाने के लिए उनके खिलाफ झूठी खबर चलाने और उन्हें ट्रोल करने का खेल खेला है, ताकि वह दबाव में आकर सभी तरह की जांच को रोक दें। अंग्रेजी मीडिया का एक बड़ा वर्ग वामपंथी विचारधारा से प्रेरित है, जिसके कारण वह देश में कांग्रेस व कम्युनिस्ट के अलावा किसी भी अन्य सरकार को झूठ फैलाकर गिराने का खेल खेलता रहता है।

ज्ञात हो कि कठुआ रेप केस मामले में भी अंग्रेजी पत्रकार शेखर गुप्ता, बरखा दत्त और स्वाति चतुर्वेदी ने घटना के तीन महीने बाद झूठ प्रसारित करते हुए ट्वीटर पर संगठित अभियान चलाकर इसे हवा दी थी, जिसकी पुष्टि ट्वीटर एनालिसिस से होती है। इंडिया स्पीक्स डेली पर इस बावत खबर भी प्रकाशित की गई थी।

URL: the teligraph and pti exposed for fake news against Tripura Chief Minister Biplab Kumar Deb

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