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एयरसेल-मैक्सिस घोटाला मामले में चिदंबरम के खिलाफ चार्जशीट दायर करने में हुई देरी के लिए जिम्मेदार कौन?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के देश से भ्रष्टाचार मिटाने वाले वादे पर ही देशवासियों ने 2014 में सत्ता सौंपी थी। इस लिहाज से देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी लड़ाई में 19 जुलाई 2018 को एक ऐतिहासिक दिन कहा जाए तो गलत नहीं होगा। क्योंकि इसी दिन सीबीआई ने दागी पूर्व केंद्रीय वित्त और गृह मंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ एयरसेल-मैक्सिस घोटाला मामले में चार्जशीट दायर की है। जबकि चिदंबरम के खिलाफ काफी सालों से सीबीआई जांच चल रही थी।

अब जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, तो यह सवाल उठता है कि आखिर देश के सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने में इतना वक्त क्यों लगा? दूसरा प्रश्न उठता है कि सीबीआई की एयरसेल-मैक्सिस जांच में कौन हीरो हैं और कौन विलेन रहा हैं? सीबीआई की अंदरुनी लड़ाई के हीरो और विलेन के बारे में पीगुरु वेबसाइट ने पूरा खुलासा किया है। वहीं से उठाए गए तथ्य से हम भी आपको अवगत कराते हैं कि किस किस अधिकारियों ने चार्जशीट दायर करने में अहम भूमिका निभाई है? कौन वह अधिकारी है जो अभी तक पी चिदंबरम की ढाल बना हुआ था। पहले बात करते हैं बचाने वाले विलेन अधिकारी की।

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सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना
सीबीआई में अतिरिक्त निदेशक के रूप में राकेश अस्थाना की पोस्टिंग अप्रैल 2016 में हुई थी। तब से लेकर अब तक उन्होंने सीबीआई में रहते हुए कई दायित्व निभाए। 2 दिसंबर 2016 में जब सीबीआई निदेशक के पद से अनिल सिन्हा को हटाया गया तब कुछ दिनों के लिए अंतरिम या कार्यकारी निदेशक का दायित्व अस्थाना को मिला था। बाद में वह विशेष निदेशक बन गए। जब से सीबीआई में उनकी नियुक्ति हुई है पी चिदंबरम और विजय माल्या जैसे हाई प्रोफाइल केस हैंडल करने को मिला है।

लेकिन जब आलोक वर्मा सीबीआई के निदेशक बने तो उन्होंने अस्थाना के विशेष निदेशक के पद पर प्रोन्नति का विरोध किया था। उन्होंने अक्टूबर 2017 में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित चयन समीति की बैठक में लिखित रूप में विरोध किया था। वर्मा का कहना था कि चूंकि सनदेसरा समूह तथा गुजरात स्थित उसकी सहयोगी कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक से 3.8 करोड़ रुपये लेने के मामले में अस्थाना के खिलाफ जांच चल रही है इसलिए तत्काल उनकी प्रोन्नति विशेष निदेशक के पद पर नहीं होनी चाहिए। हालांकि सीवीसी ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की आपत्ति को नजरंदाज करते हुए महज 24 घंटे के अंदर प्रोन्नति का आदेश जारी कर दिया।

चिदंबरम के खिलाफ एयरसेल घोटाला का मामला काफी पुराना है। अब सवाल उठता है कि अस्थाना ने करीब दो सालों तक पी चिदंबरम मामले की जांच क्यों नहीं की? इससे जुड़े सारे पहलुओं को जैसे ही इकट्ठा करेंगे जांच न होने की पहेली खुद सुलझ जाएगी। जब प्रवर्तन निदेशालय ने पी चिदंबरम के दिल्ली स्थित आवास की तलाशी ली तो वहां से कई गोपनीय दस्तावेज मिले। चिदंबरम के आवास से सीबीआई की वह जांच रिपोर्ट मिली जो गोपनीय थी, और बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को भेजी गई थी। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ी हिदायत दी थी कि इस मामले की जांच नियत समय में पूरी कर चार्जशीट दाखिल की जाए। इसके बावजूद राकेश अस्थाना ऐसे बैठे रहे जैसे उनकी कान तक सुप्रीम कोर्ट की आवाज पहुंची ही नहीं।

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने अप्रैल 2018 में अगस्ता वेस्टलैंड तथा बोफोर्स केस को छोड़कर सारे बड़े केस अस्थाना से छीन लिए। इसके बाद ही नए अतिरिक्त निदेशक एके शर्मा के अंतर्गत चिदंबरम मामले की जांच में गति आई। महज पांच महीन में जांच पूरी करने के साथ ही चिदंबरम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। अब सवाल उठता है कि आखिर राकेश अस्थाना करीब दो सालों तक चिदंबरम की जांच पर कुंडली मारकर क्यों बैठे रहे? वे क्यों प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक से जांच की प्रगति को लेकर धोखाधड़ी कर रहे थे? क्यों वे चिदंबरम को बचाने का प्रयास कर रहे थे? क्या सरकार का ही कोई आदमी उन्हें ऐसा करने को कहा था? लेकिन इस सबसे भी अहम सवाल यह है कि आखिर कुछ नौकरशाह इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गलत सूचना देकर क्यों गुमराह कर रहे थे ?

एक तरह इतना बड़ा खेल चल रहा था वहीं दूसरी तरफ अस्थाना सीबीआई और ईडी अधिकारियों के खिलाफ बीएसएफ के सेवानिवृत्त लोकसंपर्क अधिकारी के माध्यम से मीडिया में फेक स्टोरी प्लांट करने में व्यस्त थे।

चार्जशीट दाखिल करने के हीरो सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा
सीबीआई के इतिहास में भी ऐसा पहली बार हुआ होगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को बढ़ाने के लिए किसी निदेशक को अपने ही संगठन के तत्वों से लड़ना पड़ा हो। लेकिन सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को इस प्रकार की लड़ाई का सामना करना पड़ा है। वर्मा ने अस्थाना के प्रमोशन का विरोध कर न केवल प्रशंसनीय कार्य किया बल्कि पी चिदंबरम और उसके बेटे कार्ति चिदंबरम का केस भी अस्थाना से लेकर एके शर्मा को दे दिया। यह उनका सबसे साहसिक कदम में से एक है। उन्होंने सीवीसी को पत्र लिखकर कहा था कि चूंकि अस्थाना के खिलाफ जांच जारी है इसलिए उनकी अनुपस्थिति में अस्थाना को उनका प्रतिनिधि नहीं बनाया जाए।

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नोट: उपरोक्त सन्दर्भ पीगुरु वेबसाइट से लिया गया है India Speaks Daily किये गए दावों की पुष्टि नहीं करता है!

URL: Who is responsible for delay in filing charge sheet against Chidambaram in Aircel-Maxis case?

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