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रिव्यू – जुमानजी द नेक्स्ट लेवल – देखने में खूबसूरत और महसूस करने में रोलर कोस्टर राइड

गेम बदल चुका है। जुमांजी की दुनिया में हरियाली लाने वाली मणि चुरा ली गई है। चारों ओर मरुस्थल और बर्फ है। हरियाली का नामोनिशान नहीं बचा है। खिलाडियों को जुमांजी को बचाने के लिए खेल में वापस जाना ही होगा। ऐसा खेल, जिसमे वापसी की कोई गारंटी नहीं है क्योंकि ये जुमांजी का नेक्स्ट लेवल है।

लोगों को सशरीर अपनी दुनिया में खींच लेने वाला जादुई वीडियो गेम ‘जुमांजी’ खराब हो गया है। तकनीकी गड़बड़ी से गेम के भीतर दो ‘अनियमित प्लयेर’ भी समा गए हैं। स्पेंसर ‘जुमांजी’ का प्ले बटन ऑन कर देता है। दोनों बूढ़े भी इस रहस्यमयी खेल में समा जाते हैं। गेम में दोनों बूढ़े नहीं, बल्कि बलिष्ठ और युवा हैं। जुमांजी के खतरनाक लेवल पार करते हुए दोनों के मन का बैर दूर होता है। खेल ख़त्म होने पर सभी वापस जाते हैं लेकिन माइलो वही रुकने का फैसला करता है। माइलो एक घोड़ा बनकर जुमांजी में ही रह जाता है। जुमांजी : द नेक्स्ट लेवल हर मामले में नेक्स्ट लेवल पर पहुँच गई है। इस बार फिल्म में ‘इमोशंस’ का लेवल भी काफी हाई रखा गया है और सही मायने में इन्ही ‘इमोशंस’ के चलते आप इस रोमांचकारी फिल्म से प्यार कर बैठते हैं।

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900 करोड़ के मेगा बजट से बनी ‘जुमांजी : द नेक्स्ट लेवल‘ दर्शक को वह सब कुछ डिलेवर करती है, जिसके लिए ये सीरीज जानी और पहचानी जाती है। सांसे थाम देने वाले स्टंट, बहुत ही सुंदर नयाभिराम लोकेशंस, अचूक वीएफएक्स, एक अच्छी स्टार कॉस्ट और एक रोचक कहानी को मिलाकर ये फैमिली फ्रेंडली एंटरटेनमेंट बन जाती है। भले ही इस फिल्म को समीक्षकों ने एक औसत फिल्म बताया हो, दर्शकों ने इसे हाथोहाथ लिया है। सिर्फ तीन दिन में जुमांजी : द नेक्स्ट लेवल’ की कमाई 300 करोड़ पार कर गई है।

कहानी: पिछली बार के अनुभव के बाद स्पेंसर, बेथनी, मार्था और फ्रिज ने तय किया था कि ‘जुमांजी’ को कभी नहीं खोलेंगे। कॉलेज की छुट्टियों में चारों दोस्त मिलने की जगह तय करते हैं लेकिन वहां स्पेंसर नहीं पहुँचता। पता चलता है कि उसने गेम ओपन कर लिया है और उसमे स्पेंसर के दादा और उनके एक दोस्त भी समा गए हैं। स्पेंसर और उसके नाना को वापस लाने के लिए बेथनी, मार्था और फ्रिज भी जुमांजी में जाते हैं।

दर्शक के टिकट के पैसे तो उस पहले एक्शन सीक्वेंस में वसूल हो जाते हैं, जब स्पेंसर और उसके साथी रेगिस्तान में ऑस्ट्रिच के झुण्ड से बचने का रोमांचकारी लेवल पार करते हैं। ऐसे ही दृश्यों से फिल्म लबरेज है। फिल्म का थ्रीडी बहुत पॉवरफुल है। जुमांजी की रहस्यों से भरी दुनिया को थ्रीडी एक्सपीरियंस में देखना सुखद लगता है। जुमांजी तकनीकी रूप से भले ही बहुत बदल गई हो लेकिन इसका ‘मूल दर्शन’ आज भी तस का तस है। सन 1995 से लेकर अब तक जुमांजी के पात्र इस खेल में जाकर बदल जाया करते हैं।

वे गेम में जाकर असल जीवन की कठिनाईयों पर जीत पाने का प्रयास करते हैं। उनका वास्तविक जीवन बहुत रूखा है और जुमांजी की दुनिया जादू से भरी हुई है। वे यहाँ अपनी कमज़ोरियों पर काबू पा सकते हैं। इस बार दो बूढ़ों को इस ‘दर्शन’ के साथ कथा में लाया गया और निर्देशक बहुत हद तक सफल रहा है। कुल मिलाकर ये परिवार के साथ देखी जाने वाली फिल्म है। ये देखने में खूबसूरत हैं और महसूस करने में एक रोलर कोस्टर राइड है। इस वीकेंड जुमांजी का जाना-पहचाना नगाड़ा सुनने के लिए टिकट कटाया जा सकता है।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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