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Movie Review: दर्शक को एंगेज रखने का दम रखती है ‘सनक’

विपुल रेगे। जब विद्युत् जम्वाल किसी एक्शन-थ्रिलर का हिस्सा होते हैं तो दर्शकों की उत्सुकता उस फिल्म के लिए बढ़ जाती है। ‘सनक’ एक ऐसी ही फिल्म है जो अपनी कुछ कमियों के बावजूद दर्शक को एंगेज रखने का दम रखती है। यदि फिल्म में विद्युत् के विश्व स्तरीय एक्शन हो और साथ ही एक अच्छा स्क्रीनप्ले हो तो मनोरंजन की संभावनाएं काफ़ी हद तक बढ़ जाती है। जब बॉलीवुड के बुढ़ाते सुपरस्टार लगातार फ्लॉप फ़िल्में देने का कीर्तिमान बना रहे हो तो ऐसे में युवा कलाकार ऐसी फ़िल्में तो लेकर आ रहे हैं, जिनमे ताज़गी हो और पैसा वसूल मनोरंजन हो।

ओटीटी मंच – डिज्नी+हॉटस्टार

विवान आहूजा एक मार्शल आर्ट ट्रेनर है। उसकी पत्नी को दिल की गंभीर समस्या होने के कारण वह उसे एक अस्पताल में भर्ती करवाता है। उस अस्पताल में जेल से एक खतरनाक कैदी भी लाया गया है। कैदी को वहां से भगाकर ले जाने के लिए एक गैंग अस्पताल पर हमला करती है और कई मरीजों के साथ लोगों को बंधक बना लिया जाता है। बंधकों में विवान की पत्नी भी शामिल है।

विवान ऐसे में निर्णय लेता है कि वह अपनी पत्नी व अन्य लोगों को बचाएगा। प्रवेश द्वार पर बम लगा दिए गए हैं इसलिए पुलिस बेबस है। गिरोह का सरगना सनकी हत्यारा है और वह लोगों को मारता जा रहा है। एक्शन फिल्मों के हिसाब से ये एक अच्छा स्टोरी प्लाट था। हालांकि अंत के बीस मिनट में निर्देशक अपनी सरपट भागती फिल्म को मुंबइया ट्रीटमेंट देने लगते हैं, जिसके कारण अंत में फिल्म अपनी ग्रिप खोती दिखाई देती है।

फिल्म के उस हिस्से को निकाल दिया जाए तो ये रिदम में चलती है। कहानी को निर्देशक ने सरसता के साथ फिल्माया है। संभवतः अंत में निर्माता के दबाव में आकर फिल्म की लंबाई बढ़ा दी गई, जिसकी कतई आवश्यकता नहीं थी। विद्युत को बड़े दिन बाद ऐसी फिल्म मिली है, जो उनकी मार्केट वेल्यू को बढ़ा देगी। उनको अपने अभिनय पर ध्यान देना चाहिए। विद्युत के पास चेहरे पर दिखाने के लिए ज़्यादा इमोशंस नहीं है।

हालाँकि वे अपने सुंदर मार्शल आर्ट से इसकी कमी पूरी कर देते हैं। उनके एक्शन सीक्वेंस फिल्म की जान बनकर उभरते हैं। सिर्फ उनके एक्शन के लिए भी ये फिल्म देखी जा सकती है। चंदन रॉय सान्याल अचानक से हिन्दी फिल्मों में उभरकर आए हैं। वे स्वाभाविक अभिनेता हैं। बंगाली पृष्ठभूमि के इस अभिनेता ने ‘सनक’ में बेहतरीन अदाकारी दिखाई है। खलनायक के रुप में वे भरपूर दरिंदगी दिखाते हैं।

नेहा धूपिया और चंदन रॉय ने भी अपने किरदारों को अच्छे अभिनय से सजाया है। पिछले दिनों अक्षय कुमार की ‘बेलबॉटम’ को थ्रिलर कहकर प्रचारित किया गया था। हालांकि अक्षय कुमार को ‘सनक’ देखकर निर्णय लेना चाहिए कि उनकी फिल्म इसके आगे क्या है। फिल्म को अच्छे रिव्यूज मिल रहे हैं। विद्युत के प्रशंसक इस फिल्म को अवश्य देखेंगे। इसे सपरिवार देखा जा सकता है क्योंकि इसमें न कोई गंदे दृश्य हैं और न कोई विवादित एंगल डाले गए हैं। ये पूर्णतः एक मनोरंजक फिल्म है।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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