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फिल्मसिटी में जमीन मांगने पहुंचे आजतक के मालिक को योगी जी ने ठेंगा दिखाया

जितेंद्र प्रताप सिंह का लेख

यह जनाब बृजेश मिश्रा हैं जो आजकल उत्तर प्रदेश में  पत्रकार का चोला पहनकर मसीहाई पत्रकार के वेश में नेता  बने है।  कभी हर 15 दिन में नौकरी बदलने वाले यह मसीहाई पत्रकार बृजेश मिश्रा आजकल अपना खुद का चैनल भारत समाचार चलाते हैं। इनका भी मुख्य पेशा वही है, जो क्षेत्रीय चैनलों के मालिकों का कारोबार है।

दलाली कर पैसा कमाना ही इनका मुख्य पेशा है। समाजवादी राज में इनकी तूती बोलती थी। इनका प्रभाव कुछ ऐसा था कि यदि इन्हें छींक भी आ जाए तो मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव समेत पूरा मंत्रिमंडल इनका हाल-चाल पूछने घर तक चला जाता था। इनके बारे में उत्तरप्रदेश में बहुत बातें चलती हैं।

ट्रांसफर पोस्टिंग से लेकर जमीन पर कब्जे करने के काम हो, सरकारी क्वार्टर अलॉटमेंट हो, बालू खनन ठेका हो, मिश्रा जी ने समाजवादियों की सत्ता में जमकर मलाई चाटी थी। जैसे ही राज्य में योगी आदित्यनाथ की सरकार आई, इनकी मलाई चाटने का कार्यक्रम बंद हो गया। दलाली पर रोक लग गई।  

इसके बाद जब बोटी नहीं मिली तो  बिलबिलाये उत्तर प्रदेश के 15 से ज्यादा क्षेत्रीय चैनलों के मालिक योगी आदित्यनाथ जी के साथ मीटिंग करने गए। उन्होंने मीटिंग के लिए अपनी अर्जी में यह लिखा था कि हमारे काम नहीं होते इसलिए हमें आपके साथ मीटिंग करनी है। योगी जी ने उत्तर प्रदेश के कई वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को बुला लिया था।

योगी जी को ऐसा लगा कि शायद इन पत्रकारों के तमाम जनहित के कार्य होंगे जो नहीं हो रहे होंगे। उसके बाद योगी जी ने मीटिंग में कहा कि आप लोग अभी मुझे बताइए कि आप के कौन कौन से ऐसे काम हैं जो नहीं हो रहे हैं। मैंने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को बुला लिया है।

मैं अभी इन्हें निर्देश दे दूंगा कि वे काम तुरंत हो जाना चाहिए। योगी जी की बात सुनकर सारे दलाल पत्रकारों की जुबान को लकवा मार गया। ये कोई जनहित के काम कराने तो योगी जी के पास गए नहीं थे। ये लोग   बिजली, पानी, सड़क, कानून व्यवस्था में सुधार के लिए तो मुख्यमंत्री के पास नहीं गए थे, फिर क्या कहते।

दरअसल ये पत्रकार योगी जी के पास जमीनों की दलाली,  ट्रांसफर पोस्टिंग की कमाई,  बालू खनिज इत्यादि के पट्टे,  मनरेगा में दलाली के लिए गए थे। योगी जी ने इन लोगों से पूछा, तब दबी जवाब में कुछ दलाल पत्रकारों ने कहा सर जी पहले अखिलेश जी के राज में हमें भी बालू खनन से लेकर जमीन इत्यादि के ट्रांसफर पोस्टिंग के काम हो जाते थे, अब नहीं हो रहे हैं।

योगी जी ने इन सभी  क्षेत्रीय चैनलों के दलाल मालिको को दुत्कारते  हुए भगाया। योगी जी ने कहा  कि जाओ आज के बाद से तुम लोग हमारे खिलाफ जितना दिखाना चाहते हो,  दिखाते रहो। हम किसी तरह की  ब्लैकमेलिंग से डरने वाले नहीं हैं। योगी जी ने कहा यदि तुम लोगों में से कोई जनहित का कार्य लेकर आएगा तो वह कार्य बराबर होगा।

लेकिन यदि दलाली के मुद्दे पर हमारे ऑफिस में आओगे तो जेल जाओगे। उसके बाद से पत्रकार बृजेश मिश्रा लगातार ट्वीटर और अपने चैनल के द्वारा योगी सरकार के खिलाफ विषवमन करता रहता है। ब्रजेश मिश्रा की एक महिला पत्रकार है। इन्होने एक दूसरे सरनेम वाले वामपंथी से शादी की है लेकिन अपने नाम के आगे मिश्रा सरनेम लगाती है।

ऐसा करने का कारण है कि इनके ब्राम्हण कार्ड का एजेंडा चलता रहे। ये महिला पत्रकार आजकल हाथरस के मुद्दे पर एक मसीहा पत्रकार बनी हुई है। जब योगी जी ने फिल्म सिटी बनाने की घोषणा की, तब दिल्ली से आज तक के मालिक अरुण पुरी,  इंडिया टीवी के मालिक रजत शर्मा और भारत समाचार के बृजेश मिश्रा सहित कई बड़े मीडिया संस्थान योगी जी से मिलने गए।

इन लोगों ने योगी जी से कहा कि उस फिल्म सिटी में हमें भी सब्सिडी रेट पर जो ₹1 वर्ग फीट होता है, जमीन दी जाए। दरअसल इन मीडिया के दलालों को पहले ही नोएडा में ₹1 वर्ग फीट पर बहुत बड़ी-बड़ी जमीने मिली हुई है।  जहां ये लोग  अपना दलाली का अड्डा चलाते हैं। 

योगी आदित्यनाथ जी ने सख्ती से पूछा क्या आप फिल्म सिटी में जमीन पाने की योग्यता पूरी करते हैं?  क्या आपका कोई प्रोडक्शन हाउस है? क्या आप फिल्म निर्माण से जुड़े हैं। तो ही आप हमारे पोर्टल पर जमीन की नीलामी में हिस्सा लीजिए, आपको जमीन मिल जाएगी। लेकिन मैं यूं ही आप लोगों को सब्सिडी के रेट पर प्लाट नहीं दे सकता। उसके बाद इन चैनलों में हाथरस के मुद्दे पर एक ब्लैक मेलिंग के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश की लेकिन इन दोनों के चेहरे से नकाब बहुत जल्दी उतर गया।

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Vipul Rege

Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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3 Comments

  1. Avatar Jitendra Kumar Sadh says:

    बहुत बढिया इन लोगों का मुखौटा उतार देना चाहिए।

  2. Avatar Manju says:

    Bahut nkab hai .andhera ghna hai .kase jhuthe log ecpose honge

  3. Avatar Bharat singh says:

    रन दलाल पत्रकारों को योगी आदित्यनाथ को उसी समय जेल भेज देना चाहिए था

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