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Author: Kamlesh Kamal

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रेमिडिसीवीर का हौव्वा

कमलेश कमल। भेड़ चाल और मूर्खता में हमारा कोई मुकाबला नहीं। 20 से अधिक देशों में व्यापक ट्रायल के बाद WHO ने कहा कि रेमिडिसीवीर न मौत रोकता है, न critical कंडीशन में जाने...

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कोरोना_कॉमनसेंस

कमलेश कमल|जब जिंदगी और मौत के बीच चंद साँसों और कुछ पलों का फ़ासला हो; तो फालतू की सूचना नहीं देते। कम सूचना दें, लेकिन एकदम सही (verified) दें। स्वयं फोन नम्बर आदि चेक...

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मृत्यु आखेट कर रही, हमें बचना है।

कमलेश कमल. आज संपूर्ण मानवजाति एक अदृश्य हमले से बेहाल-खस्ताहाल है। विधि की विडंबना ऐसी कि बड़े-बड़े विनाशक आयुध धरे रह गए और लगभग 10 ग्राम विषाणुओं ने पूरी धरित्री पर विनाश का वीभत्स...

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‘प्रतीकों में महाकाली’ माता का सातवाँ रूप

कमलेश कमल अब तक सिंह की सवारी करने वाली माता अब क्यों है गर्दभ पर सवार? ‘काल’ समय को कहते हैं और मृत्यु को भी। सनातन कहता है कि काल(समय) ही काल(मृत्यु) है। यह...

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‘शक्ति-साधना और आज्ञाचक्र की वैज्ञानिकता’ माता कात्यायनी (आदि शक्ति का छठा रूप)

कमलेश कमल. पराम्बा शक्ति पार्वती के नौ रूपों में छठा रूप कात्यायनी का है। अमरकोष के अनुसार यह पार्वती का दूसरा नाम है। ऐसे, यजुर्वेद में प्रथम बार ‘कात्यायनी’ नाम का उल्लेख मिलता है।...

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स्कंदमाता (माता का पञ्चम रूप)

कमलेश कमल. माँ शेर पर सवार हैं– क्या इसका कोई प्रयोजन है? क्या ‘शिव-कंठ’ के ‘नीले’ होने का इस साधना से भी कोई संबंध है? या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो...

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“माँ की पूजा का विज्ञान” कूष्मांडा : माँ का चौथा रूप

कमलेश कमल. माता को शक्ति कहते हैं। शक्ति (power) कार्य करने की क्षमता(ability) का नाम है:- (power=work/time)। भौतिकी का नियम है कि ऊर्जा(energy) जितनी अधिक होगी, कार्य उतना अधिक संपन्न होगा। संक्षेप में शक्ति(दुर्गा)...

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चंद्रघण्टा ( माँ का तीसरा रूप)

कमलेश कमल. यह सृष्टि-चक्र शक्ति-चक्र ही है। सृष्टि का प्रत्येक प्राणी चाहे देव हो, ऋषि हो, मनुष्य हो, पशु हो या पक्षी– सबमें शक्ति है या सब इसी शक्ति की साधना या शक्ति के...

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चैत्र नवरात्र से ही भारतीय नववर्ष आरंभ होता है।

कमलेश कमल | ब्रह्मचारिणी : (माँ का दूसरा रूप ) नवरात्र वर्ष में चार बार आता है। इनमें चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र का विशेष महत्त्व है। चैत्र नवरात्र या वासंती नवरात्र से...

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क्या सच ही अंगद ने सीता को हारने की शर्त रख दी थी?

कमलेश कमल | मानस के कुछ प्रसंग जिनको लेकर शंका या विवाद की संभावना रहती है, उनमें एक के केंद्र में अंगद का यह अभिकथन है-“जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता...

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प्रतिक्रियाजीवी बनाता सोशल मीडिया

कमलेश कमल | ट्रेंड-फॉलोवर बनाम ट्रेंड-सेटर क्या आप भी हरदम यह पता करते हैं कि ट्विटर पर क्या ट्रेंड कर रहा है या फेसबुक पर किस ख़ास मुद्दे पर लोग पोस्ट और कमेंट कर...

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नवरात्र का भाषा-वैज्ञानिक माहात्मय और माँ शैलपुत्री

कमलेश कमल| माँ दुर्गा को आदिशक्ति कहा गया है अर्थात् सभी शक्तियाँ इन्हीं से निःसृत होती हैं। यही सृष्टि की नियामिका शक्ति हैं, साथ ही अखिल ब्रहमाण्ड की आधारशिला भी। यही अखिल ब्रह्माण्ड को...

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मेरे द्वारा विरचित विरह-शतक से कुछ काव्य-कुसुम

कमलेश कमल. उल्लसित कंठ से करूँ अमियप्रगल्भ-प्रभा का यशोगानतुम उर्वशी, तुम उर्मिला हे प्रियतेरा सबसे गर्वित मान (74) भूल कभी सकता हूँ क्याविरह-विदग्ध विषम यह पीड़ानयनों से मिट सकती है क्यातेरे सुभ्रुवों की कन्दुक-क्रीड़ा...

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पुष्प के सुवास का पता भ्रमर को कौन देता है?

कमलेश कमल. पुष्प के सुवास का पता भ्रमर को कौन देता है? आम्र-मंजरियों का ठिकाना कोयल को कैसे मिलता है? साइबेरिया के प्रवासी पक्षी सहस्त्र-योजन दूर भरतपुर की अनुकूल पारिस्थितिकी को कैसे जान जाते...

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संबंध क्यों टूटते हैं?

कमलेश कमल. {दुःख शृंखला के 32 मनोवैज्ञानिक निबंधों में यह आठवाँ और संबंध पर केंद्रित तीसरा है।} “आप अपना परिवार और परिवार के सदस्यों को चुनते नहीं हैं। वे आपको ईश्वर द्वारा प्रदत्त उपहार...

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राजस्थान दिवस पर विशेष! राजस्थानी-साहित्य और युद्ध-कौशल आलेख

कमलेश कमल. वीरों की भूमि राजस्थान की छटा सच ही इंद्रधनुषी है। पर, यह भी सच है कि राजस्थान का नाम सुनते ही मन में पाठ्य-पुस्तकों में वर्णित शौर्य, वीरता, ओज के किस्से ही...

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होली के रंग – अर्थ की खिड़की

कमलेश कमल. सदा आनंद रहे यही द्वारे, मोहन खेले होरी हो! वसंत को सदा से नवजीवन का मौसम माना गया है। यह पतझड़ के बाद सर्जना की ऋतु है। इसके आगमन से ही बहुत...